प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के बाहुबलियों और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले प्रभावशाली लोगों को हथियार लाइसेंस और सरकारी सुरक्षा मिलने के मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार और सभी 75 जिलों के DM-SSP से विस्तृत जवाब तलब किया है। जस्टिस विनोद दिवाकर की बेंच ने रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया, बृजभूषण शरण सिंह, धनंजय सिंह समेत 19 प्रभावशाली नेताओं और बाहुबलियों के शस्त्र लाइसेंस की पूरी जानकारी तलब की है। मामले की अगली सुनवाई 26 मई 2026 को होगी।
किन-किन नामों पर हाईकोर्ट की नजर?
हाईकोर्ट ने जिन प्रभावशाली लोगों के शस्त्र लाइसेंस और आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी मांगी है उनमें शामिल हैं — रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया, बृजभूषण शरण सिंह, धनंजय सिंह, अब्बास अंसारी, पिंटू सिंह, सुशील सिंह, विनीत सिंह, अजय मरहाद, सुजीत सिंह बेलवा, उपेंद्र सिंह गुड्डू, उदयभान सिंह, खान मुबारक, अजय सिपाही, गुड्डू सिंह, राजन तिवारी, विनोद उपाध्याय, हाजी याकूब, मदन भद्दो, सुनील राठी और विजय मिश्रा।
हाईकोर्ट ने क्या-क्या पूछा?
जस्टिस विनोद दिवाकर ने राज्य सरकार को कई अहम सवालों के जवाब देने के निर्देश दिए —
राज्य में 10 लाख से अधिक शस्त्र लाइसेंस जारी हैं। इनमें से 6,062 ऐसे लोगों को लाइसेंस दिए गए हैं जिनके खिलाफ दो या दो से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। कोर्ट ने पूछा — ऐसे लोगों को लाइसेंस किन आधारों पर दिए गए?
इसके अलावा कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि क्या इन बाहुबलियों के परिवार के अन्य सदस्यों के पास भी हथियार लाइसेंस हैं। यह भी पूछा गया कि जो जानकारी छिपाई गई — उसके लिए कौन से अधिकारी जिम्मेदार हैं।
गृह विभाग के हलफनामे से खुलासा
कोर्ट के समक्ष 20 मई 2026 को गृह विभाग के संयुक्त सचिव द्वारा दाखिल हलफनामे से यह साफ हो गया कि सरकारी आदेशों तथा आर्म्स एक्ट 1959 और उसके नियमों का सही ढंग से पालन नहीं किया जा रहा। इसी को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया।
“भय और वर्चस्व की संस्कृति बर्दाश्त नहीं” — हाईकोर्ट
जस्टिस विनोद दिवाकर ने सुनवाई के दौरान कहा — “हथियारों का सार्वजनिक प्रदर्शन समाज में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा करता है। यह कानून के शासन और सामाजिक शांति के विपरीत है।” कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भय और वर्चस्व की संस्कृति किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी — और गलत जानकारी छिपाने वाले अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।
75 जिलों के DM-SP को सख्त निर्देश
हाईकोर्ट ने प्रदेश के सभी 75 जिलों के जिलाधिकारियों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को सख्त अनुपालन आदेश दिया है। 26 मई 2026 तक जोनवार, जिलावार और थानावार उन सभी लोगों की सूची पेश करनी होगी जिनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं लेकिन फिर भी उन्हें शस्त्र लाइसेंस और सरकारी सुरक्षा मिली हुई है।
