लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन यानी NHM के तहत काम करने वाले हज़ारों संविदा कर्मचारियों का धैर्य आज टूट गया। दो से तीन महीने से वेतन और मानदेय न मिलने से आहत डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट और आशा-संगिनी कार्यकर्ताओं ने आज 21 मई से पूरे प्रदेश में कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया है। गाज़ीपुर, वाराणसी, अंबेडकर नगर, बस्ती, लखीमपुर खीरी, कन्नौज, कौशाम्बी, शाहजहाँपुर, गाजियाबाद समेत दर्जनों जिलों में सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर इसका असर दिखने लगा है।
क्या है पूरा मामला?
उत्तर प्रदेश में NHM के तहत हज़ारों संविदा कर्मचारी जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें चिकित्सक, नर्स, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट और पैरामेडिकल स्टाफ शामिल हैं। पिछले दो से तीन महीनों से इनका वेतन और मानदेय अटका हुआ है। अकेले गाजियाबाद में करीब 80 दिनों से कर्मचारियों को एक भी पैसा नहीं मिला। अंबेडकर नगर में अकेले 880 कर्मचारी इस समस्या से जूझ रहे हैं।
पिछले कई दिनों से कर्मचारी काली पट्टी बांधकर ड्यूटी कर रहे थे और अपना विरोध दर्ज करा रहे थे। सभी ने एक आवाज़ में चेतावनी दी थी कि यदि 20 मई तक बकाया वेतन नहीं मिला तो 21 मई से कार्य बहिष्कार शुरू हो जाएगा। सरकार ने कोई सुनवाई नहीं की — और आज से हड़ताल शुरू हो गई।
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किन जिलों में असर?
यह कोई एक जिले की बात नहीं है — यह पूरे उत्तर प्रदेश की तस्वीर है। गाज़ीपुर में 15 मई को ही चेतावनी जारी हो गई थी। वाराणसी में सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर कार्यरत डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ ने “नो पे — नो वर्क” का नारा बुलंद किया। बस्ती में दो दिनों तक काली पट्टी के साथ काम करने के बाद आज हड़ताल शुरू हो गई। कौशाम्बी, लखीमपुर खीरी, अंबेडकर नगर, कन्नौज, चित्रकूट, शाहजहाँपुर और गाजियाबाद — हर तरफ एक ही मांग है — वेतन दो।
कर्मचारियों का दर्द
इन कर्मचारियों की पीड़ा सिर्फ आँकड़ों में नहीं समझी जा सकती। अंबेडकर नगर के एक NHM कर्मचारी का कहना है कि बच्चों की स्कूल फीस भरना मुश्किल हो गया है। घर का किराया देने के लिए पैसे नहीं हैं। कन्नौज में कर्मचारियों ने कहा कि परिवार का भरण-पोषण भी संकट में आ गया है। जो लोग दिन-रात मरीज़ों की सेवा करते हैं, वही आज खुद बेबस खड़े हैं।
इमरजेंसी सेवाएं जारी — बाकी सब ठप
हड़ताली कर्मचारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि जनहित को ध्यान में रखते हुए इमरजेंसी सेवाएं जारी रहेंगी। लेकिन ओपीडी, नियमित जाँच, टीकाकरण और अन्य स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। ग्रामीण इलाकों में जहाँ ये सरकारी स्वास्थ्य केंद्र ही एकमात्र सहारा हैं — वहाँ इस हड़ताल का असर सबसे ज़्यादा आम जनता पर पड़ेगा।
सरकार की चुप्पी सवालों के घेरे में
जिस राज्य में अभी-अभी 16 लाख कर्मचारियों का महंगाई भत्ता बढ़ाने की घोषणा हुई, उसी राज्य में हज़ारों संविदा स्वास्थ्यकर्मी महीनों से वेतन के लिए तरस रहे हैं। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सरकार इनके साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। बार-बार ज्ञापन देने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई। अब जब हड़ताल शुरू हो गई है तो देखना होगा कि सरकार कब जागती है।
