दिल्ली। त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब और जम्मू-कश्मीर के गुर्जर मुस्लिम समुदाय के प्रमुख नेता गुलाम अली खटाना ने बुधवार को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ग्रहण की। उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा सभापति जगदीप धनखड़ की उपस्थिति में दोनों नेताओं ने पद की शपथ ली। बिप्लब देब त्रिपुरा से हुए उपचुनाव में निर्वाचित हुए हैं, जबकि गुलाम अली खटाना को उच्च सदन के लिए मनोनीत किया गया है।
बिप्लब देब — त्रिपुरा की राजनीति के मजबूत स्तंभ
बिप्लब कुमार देब का जन्म 25 नवंबर 1969 को त्रिपुरा के गोमती जिले के राजधर नगर गांव में हुआ था। उन्होंने त्रिपुरा से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और उदयपुर कॉलेज से स्नातक किया। उच्च शिक्षा के लिए वे दिल्ली आए जहां वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े और भाजपा नेता के.एन. गोविंदाचार्य के निजी सचिव के रूप में कार्य किया।
2015 में भाजपा ने उन्हें त्रिपुरा में महासंपर्क अभियान का प्रदेश संयोजक बनाया। फरवरी 2016 में वे त्रिपुरा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बने। 2018 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बनमालीपुर सीट से माकपा के अमल चक्रवर्ती को हराया और 9 मार्च 2018 को त्रिपुरा के दसवें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।
गुलाम अली खटाना — गुर्जर समुदाय का बड़ा चेहरा
गुलाम अली खटाना मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले से हैं और वर्तमान में जम्मू के भठिंडी में निवास करते हैं। 2008 में इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे भाजपा से जुड़ गए। पार्टी में उन्होंने जम्मू-कश्मीर इकाई के सचिव से लेकर वरिष्ठ उपाध्यक्ष तक की जिम्मेदारियां निभाई हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें जम्मू-कश्मीर का स्टार प्रचारक बनाया था।
भाजपा का सियासी दांव — गुर्जर-बकरवाल समुदाय को साधने की कोशिश
गुलाम अली खटाना गुर्जर मुसलमान समुदाय से आते हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार गुर्जर और बकरवाल मुसलमान जम्मू-कश्मीर की तीसरी सबसे बड़ी आबादी हैं। नए परिसीमन के बाद जम्मू और कश्मीर दोनों क्षेत्रों की करीब 20 विधानसभा सीटों पर इन समुदायों का महत्वपूर्ण प्रभाव है। गुलाम अली को राज्यसभा भेजकर भाजपा ने इन समुदायों में अपनी पैठ मजबूत करने की रणनीति अपनाई है।



