गाज़ीपुर। उपायुक्त उद्योग एवं जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केंद्र, लोकेंद्र कुमार ने बताया कि एक जनपद एक व्यंजन वित्त पोषण हेतु सहायता योजना (ODFPS) के अंतर्गत गाज़ीपुर जनपद के लिए मिर्च का आचार, मटर चाट, रसगुल्ला और जलेबी को चयनित उत्पाद के रूप में शामिल किया गया है। इन उत्पादों से जुड़े होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, मिठाई की दुकान और संबंधित उद्यम इस योजना के तहत वित्त पोषण का लाभ ले सकते हैं। नए उद्यमी भी इस योजना के अंतर्गत आवेदन कर सकते हैं। आवेदन केवल ऑनलाइन विभागीय पोर्टल msme.up.gov.in पर स्वीकार किए जाएंगे।
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चार उत्पाद चुने
एक जनपद एक व्यंजन योजना के अंतर्गत गाज़ीपुर के लिए 4 उत्पाद चुने गए हैं — मिर्च का आचार, मटर चाट, रसगुल्ला और जलेबी। इन उत्पादों का उत्पादन, बिक्री या संचालन करने वाले सभी व्यक्ति और संस्थाएं इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।
लाभार्थियों की सूची में होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, मिठाई की दुकानें और चयनित उत्पाद बनाने वाली संस्थाएं शामिल हैं। इसके अलावा नवीन उद्यमी जो इन उत्पादों से जुड़ा नया व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं वे भी आवेदन कर सकते हैं। यह योजना मौजूदा व्यवसाय के विस्तार के लिए भी लागू होती है।
आवेदन पत्र केवल msme.up.gov.in पर ऑनलाइन जमा किए जाएंगे। विभागीय कार्यालय में ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
पात्रता की शर्तें
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक की आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए। किसी भी प्रकार की शैक्षिक योग्यता की बाध्यता नहीं है।
आवेदक ने पहले केंद्र या राज्य सरकार की किसी अन्य स्वरोजगार योजना का लाभ न लिया हो। एक परिवार से केवल एक सदस्य को एक बार योजना का लाभ मिलेगा। आवेदक को पात्रता की शर्तें पूरी करने के संबंध में शपथ पत्र देना अनिवार्य है।
विशेष श्रेणी के अंतर्गत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक, ट्रांसजेंडर, महिला और दिव्यांगजन आवेदक को सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी प्रमाण पत्र देना होगा।
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वित्त पोषण और अनुदान
योजना में परियोजना लागत के हिसाब से मार्जिन मनी तय की गई है:
- ₹25 लाख तक — लागत का 25% या ₹6.25 लाख जो भी कम हो
- ₹25 से ₹50 लाख — 10% या ₹6.25 लाख जो भी कम हो
- ₹50 से ₹150 लाख — 20% या ₹10 लाख जो भी कम हो
- ₹150 लाख से अधिक — 10% या ₹50 लाख जो भी कम हो
सामान्य श्रेणी के आवेदकों को कुल लागत का 10% अपनी जेब से लगाना होगा जबकि SC, ST, OBC, महिला, दिव्यांग और अन्य विशेष श्रेणियों के लिए यह 5% तय किया गया है।
उद्यम के 2 वर्ष तक सफल संचालन के बाद मार्जिन मनी को अनुदान के रूप में बैंक ऋण में समायोजित कर दिया जाएगा।

