गाज़ीपुर। करीमुद्दीनपुर थाना क्षेत्र के एक युवक के बैंक खाते से साइबर अपराधियों ने 50 हजार रुपये की ऑनलाइन धोखाधड़ी की। पीड़ित ने फौरन राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद साइबर थाना और करीमुद्दीनपुर पुलिस ने मिलकर तकनीकी जांच की और ठगों से छीनी गई पूरी धनराशि पीड़ित के खाते में वापस जमा करा दी। शुक्रवार, 26 जून को गाज़ीपुर पुलिस ने यह जानकारी सार्वजनिक की।
50 हजार की ऑनलाइन धोखाधड़ी
करीमुद्दीनपुर थाने से जुड़े ग्राम बीबीपुर खास के निवासी आकाश गुप्ता, पुत्र शिवजी गुप्ता, साइबर अपराधियों के निशाने पर आए। उनके बैंक खाते से 50 हजार रुपये की ऑनलाइन ठगी हो गई। रकम गायब होने का पता चलते ही आकाश ने बिना देर किए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल यानी एनसीआरपी पर शिकायत दर्ज कराई।
साइबर ठगी के ज़्यादातर मामलों में पीड़ित यह मानकर बैठ जाते हैं कि गई रकम अब नहीं आएगी। यही सोच नुकसानदेह होती है, क्योंकि अपराधी ठगी के बाद रकम को कई खातों में तेज़ी से बांटते हैं और हर गुज़रते घंटे के साथ उसे ट्रेस करना कठिन होता जाता है। आकाश ने यह गलती नहीं की और उनकी समय पर दर्ज शिकायत बाद में सफलता की बुनियाद बनी।
ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। नकली कस्टमर केयर नंबर, फर्जी बैंकिंग लिंक और केवाईसी अपडेट का झांसा देकर अपराधी लोगों को फंसाते हैं। डिजिटल जागरूकता की कमी के कारण कम पढ़े-लिखे और बुज़ुर्ग लोग इनका आसान शिकार बनते हैं। जनपद गाज़ीपुर में इन दिनों साइबर अपराध पर लगाम लगाने के लिए एक विशेष अभियान चल रहा है, जिसके तहत पीड़ितों की मदद को प्राथमिकता दी जा रही है।
पुलिस ने धनराशि खाते में लौटाई
एनसीआरपी पर शिकायत मिलते ही साइबर थाना गाज़ीपुर और करीमुद्दीनपुर पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई शुरू की। थाना करीमुद्दीनपुर के प्रभारी निरीक्षक राज नारायण की अगुवाई में टीम ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई।
साइबर ठगी की रकम की रिकवरी एक जटिल प्रक्रिया होती है। अपराधी धनराशि को अलग-अलग खातों में बांटकर उसे छुपाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में पुलिस के लिए हर घंटा अहम था। आकाश की तत्काल शिकायत ने जांच को वह मौका दिया जो ज़रूरी था। टीम की कोशिश रंग लाई और पूरी 50 हजार रुपये की धनराशि उनके खाते में वापस जमा हो गई।
रकम मिलने पर आकाश गुप्ता ने कहा, “मुझे उम्मीद नहीं थी कि पूरी रकम वापस आएगी, लेकिन पुलिस की मेहनत ने यह मुमकिन कर दिखाया।”
पुलिस अधीक्षक ईरज राजा ने नागरिकों से अपील की, “ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी होने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। जितनी जल्दी शिकायत होगी, धनराशि वापस दिलाने की संभावना उतनी अधिक होगी।” गाज़ीपुर पुलिस ने इस मामले को सार्वजनिक करने का मकसद यह बताया कि अन्य पीड़ित भी हिम्मत न हारें और आगे आएं।
साइबर ठगी से कैसे बचें
गाज़ीपुर पुलिस ने इस घटना के ज़रिए नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। ओटीपी, यूपीआई पिन, बैंक पासवर्ड या खाता नंबर किसी को भी न बताएं — भले ही सामने वाला खुद को बैंक अधिकारी बताए। केवाईसी या इनाम के बहाने कोई ऐप डाउनलोड कराने की कोशिश हो तो सीधे मना कर दें। किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले सोचें।
ठगी होने पर सबसे पहले राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर फोन करें। यह नंबर चौबीसों घंटे उपलब्ध है। साथ ही cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराएं। बैंक को तुरंत सूचित करें और लेन-देन के सभी स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें।

