ग्रेटर नोएडा। जलवायु विहार सोसाइटी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थानीय इकाई ने नवंबर 2023 में दिवाली के अवसर पर एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया। यह आयोजन श्रीराम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में किया गया था। क्षेत्र के सैकड़ों निवासियों ने बड़े उत्साह के साथ इसमें भाग लिया।
2100 दीपों से जगमगाया परिसर
इस विशेष अवसर पर 2100 दीपों को प्रज्वलित कर भगवान श्रीराम की आराधना की गई। इन दीपों को 22 जनवरी 2024 की तारीख और श्रीराम के नाम की श्रृंखला में सजाया गया था। इस अनूठी सजावट ने पूरे परिसर को दिव्य आभा से भर दिया। उपस्थित सभी लोगों ने भावविभोर होकर जय श्रीराम के उद्घोष किए। दीपों की यह श्रृंखला 22 जनवरी की ऐतिहासिक तिथि को और भी यादगार बनाने का प्रयास था।
सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ने का प्रयास
इस मौके पर प्रोपमार्ट के मालिक मनीष तिवारी ने अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा — “ऐसे आयोजन समाज के हर व्यक्ति को अपनी सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ने का अवसर देते हैं।” उनका मानना है कि हमारी सांस्कृतिक विरासत ही हमारी असली पहचान है। इस तरह के कार्यक्रमों से नई पीढ़ी भी अपनी जड़ों से जुड़ती है। साथ ही समाज में एकता और भाईचारे को भी बल मिलता है।
जन आंदोलन को बढ़ावा
कार्यक्रम में सुनील कुमार त्यागी ने कहा कि यह आयोजन राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में जन सहभागिता बढ़ाने का महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा — “यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है। यह एक जन आंदोलन है जो पूरे समाज को एकजुट कर रहा है।” निवासियों ने मिलकर निर्णय लिया कि 22 जनवरी 2024 तक इस तरह के कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाएंगे। हर बार नए रूप में भगवान राम की भक्ति का प्रकटीकरण होगा।
अयोध्या की दिवाली का स्मरण
सुभाष तिवारी ने इस अवसर पर भगवान राम की विजय के बाद अयोध्या में मनाई जाने वाली दिवाली का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि जब भगवान राम 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे तब पूरे नगर में दीप जलाए गए थे। इसीलिए दिवाली का यह पर्व श्रीराम की विजय का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर नगर के सभी नागरिकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। यह देखकर मन को बहुत संतोष और प्रसन्नता हुई।
समाज को जोड़ने का माध्यम
इस सांस्कृतिक उत्सव ने लोगों को उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों से जोड़ने का काम किया। ऐसे आयोजनों से समाज में सामूहिक चेतना जागती है। लोग आपस में मिलते हैं और एक-दूसरे के सुख-दुख में भागीदार बनते हैं। इसके अलावा नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं और संस्कारों से परिचित कराने का अवसर भी मिलता है।
संघ की इस पहल की क्षेत्र में व्यापक सराहना हुई। आने वाले समय में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई गई है। सोसाइटी के निवासियों ने मिलकर यह संकल्प लिया कि वे अपनी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने के लिए हमेशा आगे आते रहेंगे।



