📌 अमित मणि त्रिपाठी
सोंदा (देवरिया)। जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी ने सोमवार को ग्राम सोंदा में जमीन क्रय-विक्रय के एक स्टांप प्रकरण का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान स्टांप शुल्क और निबंधन शुल्क में कमी उजागर होने पर जिलाधिकारी ने सब-रजिस्ट्रार सदर अजय कुमार सिंह को आख्या प्रस्तुत करते हुए स्टांप चोरी का मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए। मामले में ग्राम सोंदा निवासी चंपा देवी ने सुनील कुमार एवं रंजन कुमार शर्मा पुत्र रामेश्वर शर्मा के पक्ष में भूमि का बैनामा किया था। जांच में इंटरलॉकिंग सड़क को चकरोड दिखाकर भूमि का मूल्यांकन कम करने की बात सामने आई। निरीक्षण के दौरान सब-रजिस्ट्रार अभिलेखों के साथ उपस्थित रहे।
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इंटरलॉकिंग सड़क को दिखाया चकरोड
ग्राम सोंदा निवासी चंपा देवी ने सुनील कुमार और रंजन कुमार शर्मा के पक्ष में भूमि का बैनामा किया था। उस समय भूमि का मूल्यांकन 1 करोड़ 11 लाख 62 हजार रुपये किया गया था जिसके सापेक्ष 7 लाख 81 हजार 500 रुपये का स्टांप शुल्क लगाया गया था।
जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी ने जब स्थलीय निरीक्षण किया तो चौहद्दी में गड़बड़ी सामने आई। दस्तावेजों में इंटरलॉकिंग सड़क को चकरोड दर्शाया गया था। मौके पर जांच करने पर स्पष्ट हुआ कि वहां इंटरलॉकिंग सड़क मौजूद है जिससे भूमि का वास्तविक मूल्य बढ़ जाता है।
₹1.76 लाख की चोरी उजागर
जांच में पाया गया कि इंटरलॉकिंग सड़क की मौजूदगी के कारण भूमि का वास्तविक मूल्यांकन 1 करोड़ 38 लाख 8 हजार रुपये बनता है। जबकि बैनामे में 1 करोड़ 11 लाख 62 हजार रुपये दिखाया गया था। यानी मूल्यांकन में 26 लाख 46 हजार रुपये का अंतर सामने आया।
इस अंतर के आधार पर प्रथम दृष्टया 1 लाख 50 हजार रुपये के स्टांप शुल्क की कमी और 26 हजार 800 रुपये के निबंधन शुल्क की कमी पाई गई। कुल मिलाकर 1 लाख 76 हजार 800 रुपये की सरकारी राजस्व चोरी का मामला सामने आया।
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मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश
जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी ने सब-रजिस्ट्रार सदर अजय कुमार सिंह को आख्या प्रस्तुत करते हुए स्टांप चोरी का मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भूमि क्रय-विक्रय में वास्तविक मूल्यांकन के आधार पर ही स्टांप शुल्क लगाया जाए। यदि जांच में किसी प्रकार की कमी पाई जाती है तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।



