ग्रेटर नोएडा। नोएडा से आगरा तक 165 किलोमीटर लंबे यमुना एक्सप्रेसवे पर सफर जल्द महंगा हो सकता है। एक्सप्रेसवे का प्रबंधन देख रही कंपनी सुरक्षा ग्रुप ने 1 जून 2026 से टोल दरों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव शासन को भेजा है। इस पर जेवर-गौतमबुद्धनगर के भाजपा विधायक धीरेन्द्र सिंह ने कड़ी आपत्ति जताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और YEIDA के मुख्य कार्यपालक अधिकारी को विस्तृत पत्र लिखा है। उन्होंने महंगाई और जनहित का हवाला देते हुए इस बढ़ोतरी को तत्काल स्थगित करने की मांग की है।
कितनी बढ़ सकती हैं दरें
सुरक्षा ग्रुप ने होलसेल प्राइस इंडेक्स यानी WPI को आधार बनाकर टोल दरों में 3.5 से 4 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है। अगर यह मंजूर होता है तो निजी कार को ग्रेटर नोएडा से आगरा तक करीब 20 रुपये अधिक चुकाने होंगे। दोपहिया और ट्रैक्टर के लिए टोल करीब 10 से 20 रुपये और बस व ट्रक के लिए 40 रुपये के आसपास बढ़ सकता है। पिछली बार टोल में बढ़ोतरी अक्टूबर 2024 में 3.78 प्रतिशत की गई थी।
विधायक का तर्क — यह वक्त सही नहीं
धीरेन्द्र सिंह ने अपने पत्र में कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण ईंधन, परिवहन और जरूरी वस्तुओं के दाम पहले ही आसमान छू रहे हैं। ऐसे में टोल बढ़ोतरी से किसानों, छात्रों, दैनिक यात्रियों, छोटे व्यापारियों और उद्योगों पर दोहरी मार पड़ेगी। उन्होंने यह भी कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने से पहले टोल बढ़ाना यात्रियों के उत्साह को ठंडा करेगा।
YEIDA का रुख
यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के CEO आरके सिंह ने स्पष्ट किया है कि प्राधिकरण आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ के पक्ष में नहीं है। फिलहाल प्रस्ताव की बारीकी से समीक्षा की जा रही है और कंपनी के साथ बैठकों का दौर जारी है। शासन ने भी YEIDA से इस पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
कंपनी का पक्ष
सुरक्षा ग्रुप के CEO अभिजीत गोहिल का कहना है कि जेपी इंफ्राटेक के साथ हुए रियायत समझौते के तहत हर साल WPI के आधार पर टोल संशोधन का कानूनी प्रावधान है। कंपनी का तर्क है कि नियमित संशोधन न होने से रखरखाव प्रभावित होता है और आर्थिक नुकसान भी होता है।
लाखों यात्रियों पर पड़ेगा असर
यमुना एक्सप्रेसवे अब केवल नोएडा-आगरा को जोड़ने वाली सड़क नहीं — यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश और NCR की आर्थिक रीढ़ बन चुका है। लखनऊ-आगरा, बुंदेलखंड और बरेली एक्सप्रेसवे से जुड़ने के बाद इस पर रोजाना लाखों वाहन गुजरते हैं। किसी भी बढ़ोतरी का सीधा असर किसानों, मजदूरों और आम यात्रियों की जेब पर पड़ेगा।
