तिरुवनंतपुरम। केरल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के 10 दिन बाद आखिरकार कांग्रेस ने अपने मुख्यमंत्री का चेहरा तय कर लिया। गुरुवार को AICC की केरल प्रभारी दीपा दासमुंशी ने KPCC मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में वीडी सतीसन के नाम का ऐलान किया। इस मौके पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश, अजय माकन और मुकुल वासनिक भी मौजूद रहे। घोषणा होते ही सतीसन के आवास पर समर्थकों का जश्न शुरू हो गया।
10 दिन की जद्दोजहद — तीन नाम थे रेस में
4 मई को नतीजे आने के बाद से CM पद के लिए वीडी सतीसन, AICC महासचिव केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला के नाम सबसे आगे थे। राहुल गांधी ने खुद केरल के करीब आठ पूर्व प्रदेश अध्यक्षों से अलग-अलग मुलाकात की। कांग्रेस पर्यवेक्षक अजय माकन और मुकुल वासनिक ने नवनिर्वाचित विधायकों की राय जानी। कई दौर की मंत्रणाओं के बाद बुधवार को राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से करीब 40 मिनट की बैठक की — और फिर गुरुवार को सतीसन के नाम पर मुहर लगी।
UDF की ऐतिहासिक जीत — 10 साल बाद सत्ता वापसी
2026 केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने 140 में से 102 सीटें जीतकर लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) को सत्ता से बेदखल किया।पिनराई विजयन की सरकार का 10 साल का शासन इस चुनाव में समाप्त हो गया। इस पूरे चुनाव अभियान में वीडी सतीसन UDF का सबसे प्रमुख चेहरा थे। उन्होंने चुनाव से पहले ही सार्वजनिक रूप से UDF के 100 से अधिक सीटें जीतने का दावा किया था — और उनका यह अनुमान सटीक निकला।
कौन हैं वीडी सतीसन
वट्टासेरी दामोदरन सतीसन का जन्म 31 मई 1964 को एर्णाकुलम जिले के नेट्टूर में हुआ था। उनकी शुरुआती पढ़ाई पनांगाड हाई स्कूल में हुई। इसके बाद Sacred Heart College थेवरा से स्नातक और राजगिरि कॉलेज ऑफ सोशल साइंसेज से सोशल वर्क में स्नातकोत्तर किया। बाद में केरल लॉ एकेडमी से LLB और सरकारी लॉ कॉलेज तिरुवनंतपुरम से LLM भी किया। 1990 के दशक में उन्होंने करीब 10 साल तक केरल हाई कोर्ट में वकालत की।
छात्र राजनीति से विधानसभा तक का सफर
सतीसन की राजनीतिक यात्रा कॉलेज के दिनों से ही शुरू हो गई थी। 1986-87 में वह महात्मा गांधी विश्वविद्यालय यूनियन के अध्यक्ष रहे। KSU और यूथ कांग्रेस में सक्रिय रहे — लेकिन कई बार संगठनात्मक पदों से वंचित रहे। 1996 में पार्टी ने उन्हें परावूर से चुनाव लड़ाया — जो उस समय वामपंथ का गढ़ माना जाता था। सतीसन सिर्फ 1,116 वोटों से हारे — लेकिन हार मानकर नहीं बैठे। इलाके में जड़ें जमाते रहे और 2001 में पहली जीत हासिल की।
परावूर से लगातार छह बार जीत — हार को जीत में बदलने की कहानी
2001 के बाद से सतीसन ने परावूर से लगातार 2006, 2011, 2016, 2021 और 2026 में जीत दर्ज की। 2011 में उन्होंने CPI के वरिष्ठ नेता पन्नयान रवींद्रन को 11,349 वोटों से हराया। 2026 में CPI के ई.टी. टेसन मास्टर को 20,600 वोटों के अंतर से पराजित किया। एक समय जो सीट वामपंथ का अभेद्य किला थी — सतीसन ने उसे कांग्रेस की सबसे सुरक्षित सीटों में से एक बना दिया।
2021 में नेता प्रतिपक्ष बने — विपक्ष को धार दी
2021 में UDF की हार के बाद कांग्रेस ने एक अप्रत्याशित फैसला लेते हुए सतीसन को नेता प्रतिपक्ष बनाया — तब कई लोगों ने इसे जोखिम भरा कदम माना क्योंकि वह कभी मंत्री नहीं रहे थे। लेकिन सतीसन ने विधानसभा में अपने तीखे सवालों और तथ्यों पर आधारित बहसों से सरकार को लगातार घेरा। वित्त मंत्री टी.एम. थॉमस आइजैक के खिलाफ उनकी बहसें खासी चर्चित रहीं।
