चेन्नई। तमिलनाडु की नवनिर्वाचित तमिलागा वेट्री कझगम (TVK) सरकार के लिए बुधवार का दिन बेहद अहम रहा। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय उर्फ थलपति विजय ने विधानसभा में विश्वास मत हासिल कर लिया। मतदान में 144 विधायकों ने सरकार के पक्ष में वोट डाला जबकि 22 ने विरोध किया और 5 ने अनुपस्थित रहकर मतदान से दूरी बनाई। इस तरह TVK सरकार ने अपना पहला राजनीतिक परीक्षण सफलतापूर्वक पार कर लिया।
DMK का वॉकआउट — उदयनिधि स्टालिन का तंज
मतदान से पहले विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन के नेतृत्व में DMK के सभी विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। उदयनिधि ने TVK पर कांग्रेस समेत DMK के पुराने सहयोगियों को अपनी ओर खींचने का आरोप लगाया। वॉकआउट करते हुए उन्होंने व्यंग्य में कहा — “एक बार हम बाहर जाएंगे तो आपको बहुमत मिल जाएगा। इसी से शासन करो।” उन्होंने TVK से अपील की कि उनकी सरकार द्वारा शुरू की गई कल्याणकारी योजनाओं को राजनीति का हथियार न बनाया जाए।
TVK के साथ कौन-कौन खड़ा रहा
विजय की पार्टी TVK के पास विधानसभा में 107 सीटें थीं लेकिन मद्रास हाईकोर्ट के आदेश के कारण तिरुपत्तूर से विधायक श्रीनिवास सेथुपति को मतदान में भाग लेने की अनुमति नहीं थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने बाद में इस आदेश पर रोक लगा दी। TVK को कांग्रेस के 5, CPI के 2, CPI(M) के 2, VCK के 2 और IUML के 2 विधायकों का समर्थन मिला। इसके अलावा निष्कासित AMMK विधायक कामराज ने भी TVK का साथ दिया।
AIADMK में घमासान — व्हिप की अनदेखी
AIADMK महासचिव एडप्पादी के पलानीस्वामी ने दावा किया था कि उनके सभी 47 विधायक सरकार के खिलाफ मतदान करेंगे। लेकिन विधानसभा में AIADMK बनाम AIADMK की जंग छिड़ गई। पार्टी के वरिष्ठ नेता एसपी वेलुमणि ने सदन में भाषण दिया और TVK के पक्ष में खड़े दिखे। EPS ने आरोप लगाया कि कुछ विधायकों को मंत्री पद और बोर्ड अध्यक्ष का लालच देकर खरीदा जा रहा है।
तमिलनाडु की राजनीति में नया अध्याय
TVK ने तमिलनाडु की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव लाते हुए DMK-AIADMK के दशकों पुराने वर्चस्व को तोड़ा और सबसे बड़े दल के रूप में उभरी। अब फ्लोर टेस्ट जीतने के बाद विजय सरकार पूरी ताकत के साथ अपना कामकाज शुरू कर सकेगी। तमिलनाडु की जनता को अब देखना है कि जिस बदलाव का वादा किया गया था वह जमीन पर उतरता है या नहीं।
