ग्रेटर नोएडा, 06 अक्टूबर। गौतमबुद्ध नगर कमिश्नरेट की थाना ईकोटेक-1 पुलिस और स्वाट टीम ने जाली नोट की छपाई और तस्करी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के कब्जे से 100-100 रुपये के 2,549 जाली नोट बरामद हुए हैं। इन सभी नोटों का अंकित मूल्य 2 लाख 54 हजार 900 रुपये है। कार्रवाई ग्रेटर नोएडा जोन में की गई। तलाशी के दौरान जाली नोट तैयार करने में इस्तेमाल प्रिंटर, कटिंग मशीन और एक स्कॉर्पियो कार भी बरामद हुई है।
सिरसा गोलचक्कर से गिरफ्तारी
सोमवार, 5 अक्टूबर को इकोटेक प्रथम थाने की टीम और ग्रेटर नोएडा जोन के स्वाट दल ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए सिरसा गोलचक्कर से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों की पहचान अलीगढ़ के टप्पल थाना क्षेत्र के पलार निवासी बंटी अत्री (23), चंडौस थाना क्षेत्र के कसेरू निवासी खुशदिल (21) और उपेंद्र कुमार (25) के रूप में हुई।
आरोपियों के कब्जे से 100 रुपये के कुल 2,549 जाली नोट बरामद हुए, जिनकी अंकित कीमत 2 लाख 54 हजार 900 रुपये है। इसके अलावा एक प्रिंटर, कटिंग मशीन, चार मोबाइल फोन, आईडी कार्ड, अन्य दस्तावेज और HR 30 AF 9184 नंबर की स्कॉर्पियो बरामद हुई है। इकोटेक प्रथम थाने में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
ऐसे तैयार होते थे नोट
पूछताछ में आरोपियों के जाली नोट तैयार करने का तरीका सामने आया। पुलिस के मुताबिक, सबसे पहले 100 रुपये का एक असली नोट स्कैन किया जाता था। इसके बाद प्रिंटर की मदद से उसी सीरियल नंबर वाली कई प्रतियां तैयार की जाती थीं। छपाई के बाद कटिंग मशीन से कागज को असली करेंसी के आकार में काटा जाता था।
तैयार नोटों को गड्डियों की शक्ल दी जाती थी। जांच में पकड़ में न आएं, इसलिए हर गड्डी की ऊपरी और निचली परत में असली नोट लगाया जाता था। दोनों छोर पर केनरा बैंक का जमा पर्ची फॉर्म रखकर रबर बैंड लगाया जाता था, ताकि पूरी गड्डी असली रकम जैसी दिखाई दे। पुलिस के मुताबिक, इन्हें असली मुद्रा बताकर लेनदेन में उतारने की तैयारी थी।
गिरोह के नेटवर्क की जांच
एडीसीपी ग्रेटर नोएडा अभय कुमार मिश्र ने बताया कि आरोपी सामान्य तकनीक से जाली नोट तैयार कर रहे थे। इसके लिए असली 100 रुपये के नोट को स्कैन कर उसकी प्रतिकृति तैयार की जाती थी। कंप्यूटर की मदद से एक जैसे सीरियल नंबर वाले नोट प्रिंट करने के बाद कटिंग मशीन से उन्हें सही आकार दिया जाता था।
उन्होंने आगे बताया कि आरोपियों के पास से कोई अत्याधुनिक तकनीक नहीं मिली। वे कलर प्रिंटर और स्कैनर की मदद से जाली नोट तैयार कर रहे थे। पुलिस तीनों आरोपियों से पूछताछ कर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और जाली नोटों की सप्लाई के नेटवर्क का पता लगा रही है।

