गाजीपुर। जिस धरती ने 1942 में आठ बेटों को देश की आजादी के लिए कुर्बान कर दिया — उस शेरपुर को शुक्रवार शाम एक नई सौगात मिली। गाजीपुर के शेरपुर में नया पंचायत सचिवालय बनकर तैयार हुआ। जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने फीता काटकर इसका लोकार्पण किया। शिलापट्ट का अनावरण भी हुआ। यह भवन मोहम्मदाबाद तहसील अंतर्गत भांवरकोल विकास खंड की ग्राम पंचायत शेरपुर में बना है। इसके साथ ही करीब 50 लाख रुपये की लागत से बना यह भवन अब गांव के हर घर की समस्या सुनने का केंद्र बनेगा।
शहीदों की धरती — जिसे इतिहास ने भुला दिया
शेरपुर महज एक गांव नहीं — यह गाजीपुर की वह धरती है जिसने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अपना लहू बहाया। 8 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी ने मुंबई के गोवालिया टैंक मैदान (अब अगस्त क्रांति मैदान) से “भारत छोड़ो आंदोलन” का ऐलान करते हुए “करो या मरो” का मंत्र दिया था। इसी आह्वान की गूंज 18 अगस्त को शेरपुर तक पहुंची — और गांव के सैकड़ों नौजवानों ने हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद मोहम्मदाबाद तहसील पर तिरंगा फहराने का संकल्प लिया।
जब यह जुलूस तहसील तक पहुंचा तो तहसीलदार ने निहत्थी भीड़ पर गोली चलवा दी। इस गोलीबारी में आठ वीर सपूत शहीद हो गए — डॉ. शिव पूजन राय, वंश नारायण राय प्रथम, वंश नारायण राय द्वितीय, वशिष्ठ नारायण राय, ऋषेश्वर राय, राजा राय, नारायण राय और राम बदन उपाध्याय।इसीलिए आजादी से पांच साल पहले इन्हीं शहीदों की बदौलत मोहम्मदाबाद तहसील को आजाद घोषित कर दिया गया था। उन्हीं की याद में तहसील परिसर को अष्ट शहीद पार्क के रूप में तब्दील किया गया है जहां हर साल 18 अगस्त को श्रद्धांजलि दी जाती है।
DM बोले — लखनऊ सचिवालय से बेहतर है यह भवन
लोकार्पण समारोह में जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि यह सचिवालय गांव के लिए असली सौगात है। अब आपकी हर समस्या एक ही जगह सुनी जाएगी। भवन की गुणवत्ता की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह लखनऊ सचिवालय से भी बेहतर बना है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि यहां से प्रमाण पत्र, पेंशन, मनरेगा, आवास और अन्य सरकारी योजनाओं की सेवाएं एक ही छत के नीचे मिलेंगी।
50 लाख की लागत — दो स्रोतों से बना भवन
इस भवन की कुल लागत करीब 50 लाख रुपये रही। पंचायती राज विभाग ने 20 लाख रुपये आवंटित किए। जबकि चहारदीवारी समेत परिसर को सुसज्जित करने के लिए ग्राम निधि से 30 लाख रुपये अलग से खर्च किए गए। साथ ही DM ने जनसहभागिता की तारीफ करते हुए कहा कि भवन की गुणवत्ता में ग्रामवासियों की सक्रिय भागीदारी का अहम योगदान रहा।

वृक्षारोपण, सम्मान और बच्चों में मिठाई
समारोह में वृक्षारोपण भी हुआ। जिलाधिकारी ने कचनार का पौधा लगाया। उपजिलाधिकारी डॉ. हर्षिता तिवारी ने महोगनी का पौधा रोपा। ग्राम प्रधान अंजली राय ने दोनों अधिकारियों को अंगवस्त्रम और बुके से सम्मानित किया। किसान पूर्व माध्यमिक विद्यालय की छात्राओं ने पुष्प वर्षा और स्वागत गीत प्रस्तुत किया। लोकार्पण के बाद DM ने वहां मौजूद बच्चों को अपने हाथों से मिठाई बांटी।
गांव की आवाज — DM के कानों तक पहुंची
समारोह का माहौल जब थोड़ा शांत हुआ तो सेवानिवृत्त शिक्षक राजेंद्र राय ने खड़े होकर वो बात कही जो शायद पूरा गांव कहना चाहता था। उन्होंने स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों का न होना, टूटी सड़कों और पुलियों की बदहाली तथा रिंग रोड की जरूरत जिलाधिकारी के सामने रखी। इसके अलावा समारोह में ग्रामीणों ने गांव में एक सामुदायिक कार्यक्रम भवन बनाने की मांग भी रखी — जहां पंचायत के सामूहिक आयोजन, उत्सव और बैठकें हो सकें। इस पर DM ने जिला पंचायत राज अधिकारी रमेश चंद्र उपाध्याय को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
दीवार पर दर्ज हुआ एक नाम
भवन के सभागार में एक पट्टिका लगाई गई — पूर्व ग्राम प्रधान स्वर्गीय महेंद्र प्रसाद राय के नाम की। जिन्होंने गांव के लिए जो किया वो पत्थर पर उकेर दिया गया। इसे दलगत भेदभाव से ऊपर उठकर किया गया काम बताया गया — और ग्राम प्रधान की इस सोच की सराहना हुई।
