गाजीपुर। सपा सांसद अफजाल अंसारी गुरुवार को सीजेएम नूतन द्विवेदी की अदालत में पेश हुए। अदालत ने सुनवाई के बाद उन्हें मुचलके पर जमानत दे दी। यह मामला महाकुंभ 2025 से पहले गांजे को वैध करने संबंधी उनके उस बयान से जुड़ा है जिसने सितंबर 2024 में पूरे प्रदेश में हलचल मचा दी थी।
बयान जो बन गया मुसीबत
सितंबर 2024 में गाजीपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अफजाल अंसारी ने कहा था कि गांजे को कानूनन वैध कर देना चाहिए। उन्होंने यह भी कह दिया कि महाकुंभ मेले में एक मालगाड़ी गांजा भी कम पड़ जाएगा। यह बयान आते ही विवाद खड़ा हो गया। शहर कोतवाली में तत्कालीन एसआई राजकुमार शुक्ला की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने विवेचना पूरी कर कोर्ट में चार्जशीट भी दाखिल कर दी। एमपी/एमएलए स्पेशल कोर्ट चार्जशीट का संज्ञान ले चुकी है।
पहले हाईकोर्ट से मिली थी राहत
एक मई को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस विक्रम डी. चौहान की एकलपीठ ने सांसद को तीन सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट में डिस्चार्ज एप्लीकेशन दाखिल करने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि अर्जी दाखिल होने पर आरोप तय करने से पहले उस पर विचार किया जाएगा। इसके साथ ही ट्रायल कोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल करने की अनुमति भी दी गई थी और 15 दिनों तक किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई गई थी।
अब ट्रायल कोर्ट से मिली जमानत
हाईकोर्ट के आदेश के बाद गुरुवार को अफजाल अंसारी सीजेएम अदालत में पेश हुए। अदालत ने मामले की सुनवाई कर उन्हें मुचलके पर जमानत दे दी। हालांकि एमपी/एमएलए स्पेशल कोर्ट में कार्यवाही अभी जारी है और सांसद की ओर से उसे निरस्त कराने की याचिका हाईकोर्ट में दाखिल की गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट की तरह इस मामले में भी अगली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।
