📌 अमित मणि त्रिपाठी
देवरिया। जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी की अध्यक्षता में शनिवार 4 जुलाई को कलेक्ट्रेट सभागार में जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक हुई। समीक्षा के दौरान दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही सामने आने पर डीएम ने सभी बीपीएम और बीसीपीएम का एक दिन का वेतन रोकने का आदेश दिया। साथ ही सभी प्रभारी चिकित्साधिकारियों को अपने अधीनस्थ कर्मियों पर सख्त निगरानी रखने का निर्देश मिला, ताकि स्वास्थ्य योजनाओं का क्रियान्वयन बिना रुकावट चल सके।
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भटनी, मझगांवा और लार पर कार्रवाई
बैठक में योजनाओं की प्रगति परखने के दौरान भटनी और मझगांवा के प्रभारी चिकित्साधिकारियों का भी एक-एक दिन का वेतन रोकने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा लार के प्रभारी चिकित्साधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी करने का आदेश दिया। जिन सीएचओ की उपस्थिति महीने में 20 दिन से कम पाई गई, उनसे भी स्पष्टीकरण तलब किया जाएगा।
मंत्रा ऐप पर टीकाकरण से जुड़ी जानकारी अपलोड करने में देरी सामने आने पर बीपीएम भाटपाररानी समेत जुड़े कर्मियों का एक दिन का वेतन रोका गया। वहीं भलुअनी में तैनात रहे और अब स्थानांतरित हो चुके फार्मासिस्ट पर दवाओं की मांग समय पर न भेजने का आरोप लगा, जिसके चलते उनका वेतन भी बाधित करने का निर्देश दिया गया। इन दोनों मामलों से साफ है कि डीएम ने वेतन रोकने की कार्रवाई सिर्फ स्वास्थ्य ब्लॉकों तक सीमित न रखकर हर उस कड़ी तक बढ़ाई, जहां लापरवाही की गुंजाइश दिखी।
गांव-गांव भ्रमण के निर्देश
मातृ एवं शिशु मृत्यु के मामलों पर डीएम ने अलग रणनीति बनाई। उन्होंने कहा कि जिन गांवों में ऐसी मौतें दर्ज हुई हैं, वहां आशा, आंगनबाड़ी और एएनएम कार्यकर्ता मिलकर कारणों की पड़ताल करें और स्वास्थ्य कर्मियों को बचाव के तरीकों के प्रति जागरूक बनाएं। इसके साथ ही जिला कार्यक्रम अधिकारी को निर्देश दिया गया कि इन्हीं गांवों में सीडीपीओ और सुपरवाइजर भी भेजे जाएं, जिससे योजनाओं की पहुंच जमीनी स्तर तक सुनिश्चित हो सके।
गर्भवती महिलाओं सहित आमजन को जागरूक करने पर भी जोर दिया गया। डीएम ने प्रभारी चिकित्साधिकारियों और सीडीपीओ टीमों को मंगलवार तक इन गांवों का भ्रमण पूरा कर रिपोर्ट सौंपने का समय दिया। इसके अतिरिक्त हाई रिस्क प्रेगनेंसी (एचआरपी) वाली महिलाओं की पहचान करने और आशा-आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नियमित फील्ड विजिट सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया।
स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण समिति के सत्रों में जरूरी उपकरणों की कमी न रहे, इसके लिए ग्राम प्रधानों को जिला पंचायत राज अधिकारी के जरिए पत्र भेजने का निर्देश भी दिया गया। मातृ-शिशु मृत्यु के मामलों में ऑडिट से मिली जानकारी आशा कार्यकर्ताओं तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई, ताकि आगे ऐसी घटनाएं रोकी जा सकें।
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हर तीसरे दिन होगी बैठक
डीएम ने बैठक में स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य विभाग की योजनाएं सीधे जनता के जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ी हैं, इसलिए इनका क्रियान्वयन समयबद्ध, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण होना चाहिए। “किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी” — डीएम ने बैठक में कहा। उन्होंने आगे बताया कि जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक अब हर तीसरे दिन होगी और सभी अधिकारियों को हर बिंदु की अद्यतन जानकारी के साथ हाजिर रहना होगा।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी राजेश कुमार सिंह, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज डॉ. रजनी पटेल, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. ए.के. गुप्ता, सीएमएस डॉ. एच.के. मिश्रा, जिला पंचायत राज अधिकारी रतन कुमार और जिला कार्यक्रम अधिकारी आदीश मिश्रा मौजूद रहे। इनके अलावा एसीएमओ, डिप्टी सीएमओगण तथा नगरपालिका व नगर निकायों के अधिशासी अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।

