लखनऊ/नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के मंत्रिमंडल विस्तार के चार दिन बाद भी विभागों का बंटवारा न होने से जो सियासी बेचैनी थी — वह गुरुवार को काफी हद तक शांत हो गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उनके आवास पर जाकर मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक बंद कमरे में बातचीत हुई। गृह मंत्रालय ने खुद सोशल मीडिया पर इस भेंट की पुष्टि की।
चार दिन से क्यों थी बेचैनी
10 मई को योगी सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार हुआ था। इसमें छह नए नेताओं को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई और दो राज्य मंत्रियों को कैबिनेट का दर्जा दिया गया था। लेकिन शपथ के बाद से विभाग आवंटन को लेकर कोई घोषणा नहीं हुई। चार दिन बीतने के बाद भी नए मंत्रियों को यह नहीं पता था कि उन्हें कौन सा मंत्रालय मिलेगा। इससे सियासी गलियारों में तरह-तरह की अटकलें चलने लगीं। किसे क्या मिलेगा — इस पर हर दिन नए दावे और काउंटर दावे होने लगे। अब शाह-योगी बैठक के बाद सूत्रों का कहना है कि विभागों के बंटवारे पर सहमति बन गई है और घोषणा जल्द होगी।
बैठक में क्या-क्या तय हुआ
सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में दो बड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। पहला — नए मंत्रियों को कौन से विभाग दिए जाएं। दूसरा — 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए अगली रणनीति क्या हो। दोनों विषयों पर केंद्रीय नेतृत्व और मुख्यमंत्री के बीच पूरी सहमति बनी। जानकारों के मुताबिक इस बार विभाग देते वक्त सिर्फ प्रशासनिक दक्षता नहीं देखी गई — बल्कि यह भी देखा गया कि कौन सा मंत्री किस विभाग से अपने क्षेत्र और समुदाय में भाजपा की छवि को ज्यादा मजबूत कर सकता है।
2027 की तैयारी — हर मंत्री एक समीकरण
इस मंत्रिमंडल विस्तार को महज सरकार चलाने की कवायद नहीं माना जा रहा। भाजपा की नजर 2027 के विधानसभा चुनाव पर टिकी है और हर नियुक्ति उसी हिसाब से की गई है।
भूपेंद्र सिंह चौधरी को पश्चिमी यूपी के जाट बहुल इलाकों में भाजपा की जमीन और मजबूत करने की भूमिका सौंपी जा सकती है। 2022 में इस इलाके में भाजपा को नुकसान हुआ था — अब उसकी भरपाई करना प्राथमिकता है।
सपा का दामन छोड़कर भाजपा में आए मनोज पांडेय को ब्राह्मण समुदाय के बीच पार्टी की पकड़ और गहरी करने की जिम्मेदारी दी जा सकती है। ब्राह्मण वोट बैंक को लेकर भाजपा हमेशा सतर्क रहती है।
वहीं कृष्णा पासवान, सुरेंद्र दिलेर और कैलाश राजपूत जैसे नए चेहरों के जरिए दलित और अति पिछड़े वर्गों में सरकार की पहुंच बढ़ाने की कोशिश है। इन वर्गों को साधे बिना यूपी में बहुमत की राह आसान नहीं।
योगी की स्थिति — केंद्र का पूरा भरोसा
इस बैठक ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि केंद्रीय नेतृत्व और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच पूरी तालमेल है। मंत्रिमंडल विस्तार से लेकर विभाग आवंटन तक — हर कदम दिल्ली और लखनऊ की सहमति से उठाया जा रहा है। यह संकेत 2027 की तैयारियों के लिहाज से भाजपा के लिए बेहद अहम है।
आगे क्या होगा
विभागों की आधिकारिक घोषणा अगले कुछ दिनों में होने की उम्मीद है। विभाग आते ही नए मंत्री अपने-अपने इलाकों में पैर जमाने की कोशिश में लग जाएंगे। असली परीक्षा तब होगी जब यह देखा जाएगा कि मिले हुए दायित्व से वे अपने क्षेत्र और बिरादरी में भाजपा की जड़ें कितनी गहरी कर पाते हैं। जो मंत्री यह कसौटी पार करेगा — 2027 में उसका टिकट पक्का, जो चूका — उसकी राह मुश्किल। यूपी जैसे बड़े राज्य में चुनावी तैयारी साल-डेढ़ साल पहले से शुरू होती है — और योगी सरकार इस बार पूरी ताकत के साथ जनता के बीच जाने का मन बना चुकी है।
