नई दिल्ली। NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो को पहली बड़ी कामयाबी मिली है। महाराष्ट्र के नासिक से शुभम खैरनार नाम के 30 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया गया है। वह नासिक के इंदिरानगर इलाके का रहने वाला है और बीएएमएस (BAMS) यानी बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी की पढ़ाई कर रहा था। नासिक क्राइम ब्रांच की यूनिट-2 ने राजस्थान पुलिस के अनुरोध पर उसे हिरासत में लिया और बाद में CBI की चार सदस्यीय टीम ने उसकी कस्टडी ले ली।
मंदिर जाते वक्त पकड़ाया — बाल कटवाकर भागने की कोशिश थी
शुभम खैरनार जांच एजेंसियों से बचने के लिए काफी होशियारी दिखा रहा था। उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए बाल कटवाकर अपना रंग-रूप बदल लिया था। लेकिन नासिक क्राइम ब्रांच ने तकनीकी निगरानी और पुरानी तस्वीरों से मिलान करके उसे ढूंढ निकाला। वह दोपहर में एक मंदिर में जाते हुए पकड़ा गया।
₹10 लाख में खरीदा — ₹15 लाख में बेचने की फिराक में था
जांच में जो सबसे चौंकाने वाला खुलासा हुआ वह यह है कि शुभम ने यह प्रश्नपत्र किसी प्राथमिक स्रोत से ₹10 लाख में हासिल किया था। पूरा लेनदेन एक एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप्लिकेशन के जरिए हुआ ताकि पहचान न हो सके। पेपर हाथ में आते ही उसने इसे दूसरे खरीदारों को ₹15 लाख में बेचने की कोशिश शुरू की — यानी ₹5 लाख का मुनाफा कमाने की योजना थी। CBI अब उस एन्क्रिप्टेड एप की डिजिटल ट्रेल खंगाल रही है ताकि इस नेटवर्क की असली जड़ तक पहुंचा जा सके।
नासिक है मूल — SOG का खुलासा
राजस्थान SOG के IG अजय पाल लांबा ने बताया कि अब तक की पूछताछ में नासिक इस पेपर लीक का मूल बिंदु सामने आया है। हालांकि अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि पेपर नासिक शहर से सीधे वितरित किया गया हो ऐसा अभी तक कोई ठोस सबूत नहीं है। शुभम इस पूरे नेटवर्क की एक कड़ी लगता है — असली मास्टरमाइंड और प्राथमिक स्रोत तक पहुंचना अभी बाकी है।
नालंदा में भी सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़
इसी बीच बिहार के नालंदा पुलिस ने एक सुनियोजित सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़ किया है। परीक्षा से पहले वाहन जांच अभियान के दौरान तीन लोगों को पकड़ा गया जिनमें से एक द्वितीय वर्ष का MBBS छात्र भी था। उनके पास नकद रकम, नकली प्रवेश पत्र और डिजिटल साक्ष्य मिले।
NTA पर उठ रहे सवाल
CBI के अनुसार जो भी इस लीक में शामिल है उसे बख्शा नहीं जाएगा — चाहे वह NTA के भीतर का व्यक्ति हो या बाहर का। गिरफ्तारी के बाद एक बात तो स्पष्ट हो गई है — यह हैकिंग नहीं बल्कि एक सुनियोजित अंदरूनी साजिश है।
