तिरुवनंतपुरम। केरल की राजनीति में सोमवार को एक नया अध्याय शुरू हुआ। कांग्रेस नेता वीडी सतीशन ने राज्य के 13वें मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने सतीशन और उनके 20 सदस्यीय मंत्रिमंडल को मलयालम भाषा में शपथ दिलाई। इस ऐतिहासिक मौके पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी मंच पर मौजूद रहे।
10 साल बाद केरल में बदली सत्ता — UDF की ऐतिहासिक वापसी
2026 के केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF ने वो कर दिखाया जो राजनीतिक विश्लेषक भी पूरी तरह भांप नहीं पाए थे। 140 विधानसभा सीटों में से 102 पर जीत — यह कोई साधारण बहुमत नहीं था। कांग्रेस अकेले 63 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी जबकि IUML ने 22 सीटें हासिल कीं। दूसरी तरफ पिनराई विजयन की अगुवाई में 10 साल तक सत्ता में रहे LDF को महज 35 सीटों से संतोष करना पड़ा — और BJP को सिर्फ 3 सीटें मिलीं। जनता ने बदलाव का जो फैसला सुनाया उसने पूरी राजनीतिक तस्वीर ही पलट दी।
कौन हैं वीडी सतीशन?
वीडी सतीशन केरल की राजनीति में एक जाना-पहचाना और विश्वसनीय चेहरा हैं। छह बार के विधायक और बेदाग राजनीतिक छवि वाले सतीशन ने अपने करियर की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी। यूथ कांग्रेस में सक्रिय रहने के बाद वे 2021 विधानसभा चुनाव के बाद केरल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बने। वामपंथी सरकार के खिलाफ प्रभावी विपक्षी नेता के रूप में उन्होंने खुद को स्थापित किया — और आज उसी दृढ़ता के साथ मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे।
60 साल बाद पूरे मंत्रिमंडल ने एक साथ ली शपथ
इस शपथ ग्रहण की एक ऐतिहासिक विशेषता रही — लगभग छह दशकों के बाद पहली बार केरल में मुख्यमंत्री के साथ पूरा मंत्रिमंडल एक साथ शपथ लेने के लिए एकत्रित हुआ। कैबिनेट में वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला गृह मंत्री बनाए गए हैं। KPCC अध्यक्ष सनी जोसेफ और कांग्रेस विधायक के. मुरलीधरन ने भी मंत्री पद की शपथ ली।
राहुल गांधी ने लगाया गले — एक तस्वीर जो हजार बातें कहती है
शपथ लेने के बाद मंच पर राहुल गांधी और वीडी सतीशन का मिलना सिर्फ दो नेताओं की मुलाकात नहीं थी। राहुल ने सतीशन को गले लगाया — और यह पल पूरे देश की नजरों में आ गया। कांग्रेस के लिए केरल की यह जीत सिर्फ एक राज्य की सत्ता नहीं — बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में पार्टी की मजबूत होती स्थिति का संकेत है। कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल के बाद अब केरल — कांग्रेस शासित राज्यों की संख्या बढ़ रही है और पार्टी में नई ऊर्जा का संचार हो रहा है।
पूर्व CM पिनराई विजयन भी रहे मौजूद
उल्लेखनीय है कि पूर्व मुख्यमंत्री और LDF नेता पिनराई विजयन भी शपथ ग्रहण समारोह में मंच पर नजर आए। विजयन ने पिछले 10 सालों तक केरल की सत्ता संभाली — और आज उन्हीं के उत्तराधिकारी के रूप में वीडी सतीशन मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे। हार के बावजूद विजयन का शपथ ग्रहण में शामिल होना केरल की परिपक्व और स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा का प्रतीक है — जहां सत्ता का हस्तांतरण सम्मान और शालीनता के साथ होता है।
