गाज़ीपुर। जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने तहसील सदर के अंतर्गत कुर्था क्षेत्र तथा तहसील सैदपुर के अंतर्गत बूढ़ेनाथ महादेव मंदिर सैदपुर में संचालित कटान रोधी कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, समयबद्धता एवं निर्धारित मानकों की बारीकी से जांच की। संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए और गुणवत्ता से कोई समझौता न हो।
कटान रोधी कार्य — क्यों हैं जरूरी
गाज़ीपुर जिले में गंगा और उसकी सहायक नदियों के किनारे कटान एक गंभीर समस्या है। हर साल बाढ़ के मौसम में नदी का बढ़ता जलस्तर किनारों को काटता है — जिससे खेती की जमीन और बस्तियां खतरे में पड़ जाती हैं। कटान रोधी कार्यों के तहत नदी के किनारों पर पत्थर और बोल्डर लगाकर मिट्टी को बहने से रोका जाता है। बाढ़ से पहले इन कार्यों को पूरा करना अनिवार्य होता है — ताकि मानसून आने से पहले सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
कुर्था में निरीक्षण
तहसील सदर के अंतर्गत कुर्था क्षेत्र में चल रहे कटान रोधी कार्यों का निरीक्षण करते हुए जिलाधिकारी ने कार्य की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और काम की गति को लेकर अधिकारियों से जानकारी ली। जहां कार्य में कमी पाई गई — वहां तत्काल सुधार के निर्देश दिए गए।
बूढ़ेनाथ महादेव मंदिर सैदपुर में निरीक्षण
तहसील सैदपुर के अंतर्गत बूढ़ेनाथ महादेव मंदिर के समीप संचालित कटान रोधी कार्यों का भी विस्तृत निरीक्षण किया गया। यह क्षेत्र नदी के कटान के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। जिलाधिकारी ने यहां भी कार्य की गुणवत्ता और मानकों की जांच की तथा अधिकारियों को चेतावनी दी कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
समय पर पूरा हो काम — DM का सख्त संदेश
जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने दोनों स्थलों पर निरीक्षण के बाद स्पष्ट किया कि मानसून से पहले इन कटान रोधी कार्यों को हर हाल में पूरा करना होगा। उन्होंने कहा कि कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ता से समझौता स्वीकार्य नहीं है। संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे नियमित रूप से कार्य की निगरानी करें और प्रगति रिपोर्ट समय पर प्रस्तुत करें।
कटान रोधी कार्यों में किन तकनीकों का होता है उपयोग
नदी कटान रोकने के लिए आमतौर पर पत्थर की पिचिंग, बोल्डर डंपिंग और स्पर निर्माण जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाता है। पत्थर की पिचिंग में नदी किनारे पर पत्थरों की परत बिछाई जाती है — जो मिट्टी को बहने से रोकती है। बोल्डर डंपिंग में बड़े-बड़े पत्थर नदी के तेज बहाव वाले हिस्सों में डाले जाते हैं — जिससे बहाव की दिशा बदलती है। स्पर निर्माण में नदी के किनारे से पानी के भीतर तक दीवार बनाई जाती है — जो नदी के प्रवाह को किनारे से दूर मोड़ती है। इन कार्यों की गुणवत्ता और सही तकनीक का उपयोग ही यह तय करता है कि बाढ़ में किनारा टिकेगा या नहीं।
