बेंगलुरु। कर्नाटक की राजनीति में बुधवार को एक नया अध्याय शुरू हुआ। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार ने 3 जून 2026 को लोक भवन के ग्लास हाउस में कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राज्यपाल थावरचंद गेहलोत ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह शाम 4:05 बजे शुरू हुआ। शिवकुमार ने संविधान की प्रति हाथ में लेकर शपथ ली — जो इस ऐतिहासिक अवसर की सबसे यादगार तस्वीर बनी। उनके साथ वरिष्ठ कांग्रेस नेता जी. परमेश्वर ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। सिद्धारमैया के बेटे यथींद्र सिद्धारमैया समेत 12 अन्य मंत्रियों ने भी आज शपथ ग्रहण की।
कैसे बने शिवकुमार मुख्यमंत्री
यह सत्ता परिवर्तन उस लंबे इंतजार का अंत था जो शिवकुमार 2023 से कर रहे थे। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद जब सरकार बनी तो सिद्धारमैया मुख्यमंत्री बने थे और शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री से संतोष करना पड़ा था। पार्टी के भीतर लंबे समय से बारी-बारी से मुख्यमंत्री बनाने (rotational CM) की चर्चा थी — शिवकुमार खेमे ने दावा किया कि सत्ता बंटवारे का एक समझौता हुआ था, हालाँकि सिद्धारमैया ने इसे सार्वजनिक रूप से नकारा था।
अंततः कांग्रेस हाईकमान के निर्देश पर ही यह सत्ता परिवर्तन हुआ। मई 2026 के अंत में सिद्धारमैया ने कांग्रेस हाईकमान से दिल्ली में मुलाकात के बाद इस्तीफा दे दिया। राज्यपाल ने उनका इस्तीफा स्वीकार किया। इसके बाद 30 मई 2026 को विधानमंडल दल की बैठक में शिवकुमार को सर्वसम्मति से कांग्रेस विधायक दल का नेता चुना गया। हाईकमान की तरफ से सिद्धारमैया ने ही शिवकुमार के नाम का प्रस्ताव रखा जिसे बिना किसी विरोध के स्वीकार किया गया।
कौन हैं डीके शिवकुमार
64 साल के शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय में सबसे प्रभावशाली राजनेता के रूप में जाने जाते हैं। कनकपुरा विधानसभा क्षेत्र उनका गढ़ है जहाँ से वे लगातार आठ बार जीत दर्ज कर चुके हैं। 2020 से वे कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस समिति की कमान संभाल रहे हैं। पार्टी के “troubleshooter” के रूप में उनकी पहचान है — कई राज्यों में कांग्रेस को संकट से उबारने में उनकी भूमिका रही है। शपथ से पहले शिवकुमार ने कई धार्मिक नेताओं का आशीर्वाद लिया और अपनी माँ के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। उन्होंने बताया कि सोनिया गाँधी ने फोन पर उन्हें शुभकामनाएं दीं और कहा कि सबको साथ लेकर चलें।
शपथ ग्रहण — सादगी का संदेश
यह समारोह जानबूझकर सरल और संक्षिप्त रखा गया। शुरुआत में विधान सौध के भव्य प्रांगण में बड़े आयोजन की योजना थी — पर बेंगलुरु की सड़कों पर ट्रैफिक बाधा की आशंका को देखते हुए इसे लोक भवन के ग्लास हाउस में स्थानांतरित कर दिया गया। न कोई पास जारी किया गया, न भव्य तैयारी — केवल विधायकों को आमंत्रण दिया गया। पार्टी की ओर से स्पष्ट किया गया कि शपथ समारोह दिखावे का नहीं बल्कि सेवा भाव और कार्यसंस्कृति का संदेश देने वाला होना चाहिए। शिवकुमार ने अपने आध्यात्मिक गुरु गंगाधर अज्जय्या के नाम पर शपथ ली।
कौन-कौन था मौजूद
शपथ समारोह में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की उपस्थिति रही। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी, कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल और रणदीप सिंह सुरजेवाला विशेष रूप से उपस्थित रहे। देश भर से धार्मिक नेता और गणमान्य लोग भी समारोह में शामिल हुए। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सहित कांग्रेस शासित राज्यों के नेता भी पहुँचे। पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मंच पर शिवकुमार को बधाई दी।
कर्नाटक राजनीति पर असर
शिवकुमार का मुख्यमंत्री बनना कांग्रेस के लिए दक्षिण भारत में एक मजबूत संदेश है। वोक्कालिगा समुदाय को साथ लाना और JD(S) की पारंपरिक voter base को तोड़ना — यही उनकी राजनीतिक चुनौती होगी। कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार का अब तीसरा साल चल रहा है — 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले शिवकुमार को अपनी साख साबित करनी होगी।


