गाज़ीपुर। जमानियां क्षेत्र के कालूपुर गंगा तट के सामने गंगा नदी में एक मालवाहक जलपोत पिछले 20 दिनों से बीच धारा में फंसा हुआ है। कोलकाता से वाराणसी जा रहा यह जलपोत करीब 55 मीटर लंबा, 10 मीटर चौड़ा और 300 टन वजनी है। नदी में जलस्तर अत्यंत कम होने और मानकों के अनुरूप ड्रेजिंग नहीं होने के कारण जलपोत हमीद सेतु से पहले ही रुक गया। जलपोत पर सवार आधा दर्जन क्रू मेंबर भी वहीं मौजूद हैं। भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) के डिप्टी डायरेक्टर संजीव कुमार ने बताया कि जलस्तर बढ़ने के बाद ड्रेजिंग कर जलपोत को वाराणसी रवाना किया जाएगा और पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
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कम जलस्तर में फंसा
यह जलपोत वाराणसी की फ्लोटिंग जेट्टी निर्माण परियोजना के लिए भारी उपकरण और सामग्री लेकर कोलकाता से रवाना हुआ था। हमीद सेतु से पहले कालूपुर गंगा तट के समीप नदी का जलस्तर इतना कम मिला कि जलपोत आगे नहीं बढ़ सका और बीच धारा में खड़ा हो गया।
जलपोत को निकालने के तमाम प्रयास बेकार साबित हुए और तीन सप्ताह बाद भी वह उसी जगह बना हुआ है। जलपोत पर मौजूद क्रू सदस्यों को फिलहाल भोजन और अन्य जरूरी सामान की कोई कमी नहीं है। घटना की खबर IWAI मुख्यालय तक पहुंचने के बाद प्राधिकरण में सक्रियता बढ़ गई है।
स्थानीय लोगों ने जताई नाराजगी
इस घटना ने गंगा जलमार्ग पर ड्रेजिंग प्रबंधन की खामियों को उजागर किया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर मानकों के अनुरूप ड्रेजिंग कराई गई होती तो करोड़ों रुपये की परियोजना से जुड़ा यह जलपोत बीच नदी में नहीं फंसता।
घटना के बाद IWAI की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। नियमित ड्रेजिंग से नदी में पर्याप्त गहराई बनाए रखना जलमार्ग प्राधिकरण की जिम्मेदारी है। जलपोत के 20 दिनों तक फंसे रहने से यह स्पष्ट है कि इस मार्ग पर ड्रेजिंग की निगरानी कमजोर रही।
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जलस्तर बढ़ने पर होगी ड्रेजिंग
IWAI के डिप्टी डायरेक्टर संजीव कुमार ने बताया कि गंगा में जलस्तर अत्यंत कम होने के कारण जलपोत आगे नहीं बढ़ पा रहा है। उन्होंने कहा — “जलस्तर बढ़ने के बाद आवश्यक ड्रेजिंग कर जलपोत को सुरक्षित वाराणसी की ओर रवाना किया जाएगा।” साथ ही पूरे मामले की जांच के आदेश भी दे दिए गए हैं।
फिलहाल जलपोत और उस पर मौजूद क्रू के लिए प्रतीक्षा जारी है। मानसून के साथ गंगा का जलस्तर बढ़ने पर ही जलपोत को निकाला जा सकेगा। तब तक IWAI की ओर से स्थिति पर लगातार नजर बनी हुई है।

