📌 अमित मणि त्रिपाठी
देवरिया। महर्षि देवराहा बाबा स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के दंत चिकित्सा विभाग ने विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर मंगलवार को एक व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य मरीजों, उनके परिजनों और आम नागरिकों को तंबाकू सेवन से होने वाले गंभीर स्वास्थ्य दुष्प्रभावों के प्रति सचेत करना और तंबाकू-मुक्त समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम में महाविद्यालय के वरिष्ठ चिकित्सकों, रेजिडेंट डॉक्टरों और कर्मचारियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
जागरूकता अभियान: पम्पलेट वितरण से लेकर शपथ तक
महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. रजनी पटेल मुख्य अतिथि रहीं। उन्होंने स्वयं मरीजों और उनके परिजनों के बीच जाकर जागरूकता पम्पलेट वितरित किए। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि तंबाकू न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित करता है, बल्कि पूरे परिवार और समाज पर भी नकारात्मक असर डालता है। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एच. के. मिश्रा ने भी पम्पलेट वितरण में सक्रिय भाग लिया और कहा कि तंबाकू-मुक्त समाज बनाने के लिए जनभागीदारी अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे न केवल खुद तंबाकू से दूर रहें, बल्कि अपने परिवार और पड़ोस में भी इसके विरुद्ध जागरूकता फैलाएँ। विभागाध्यक्ष डॉ. ब्रज भूषण मल्ल ने बताया कि तंबाकू मुख कैंसर, फेफड़ों के कैंसर, हृदय रोग, स्ट्रोक और श्वसन संबंधी अनेक गंभीर बीमारियों का प्रमुख कारण है। उन्होंने कहा कि भारत में हर साल लाखों लोग तंबाकू से जुड़ी बीमारियों के कारण असमय जान गँवाते हैं, जिसे समय पर जागरूकता और रोकथाम से काफ़ी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने सभी से “तंबाकू छोड़ें, स्वस्थ जीवन अपनाएँ” का संदेश अपनाने का आग्रह किया।
युवाओं से अपील और कविता पाठ ने बाँधा समाँ
वरिष्ठ रेजिडेंट डॉ. अंजली मल्ल ने विशेष रूप से युवाओं से अपील की कि वे तंबाकू एवं निकोटीन युक्त उत्पादों से दूर रहें और अपने मित्रों तथा परिजनों को भी इनके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करें। उन्होंने कहा कि दंत चिकित्सा विभाग का दायित्व केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी देना भी उनकी ज़िम्मेदारी है। कार्यक्रम के दौरान डॉ. प्रियंका कुमारी ने तंबाकू के दुष्प्रभावों पर आधारित एक प्रभावशाली जागरूकता कविता प्रस्तुत की।
कविता में तंबाकू की लत से होने वाले शारीरिक, मानसिक और सामाजिक दुष्परिणामों का मार्मिक वर्णन किया गया और लोगों को नशामुक्त एवं स्वस्थ जीवन अपनाने का संदेश दिया गया। कविता ने उपस्थित लोगों को गहराई से प्रभावित किया और अनेक लोगों की आँखें नम हो गईं। इसके अलावा डॉ. प्रियंका कुमारी एवं डॉ. निहारिका ने मरीजों और उनके परिजनों के बीच जागरूकता पम्पलेट वितरित किए और उन्हें तंबाकू से होने वाली बीमारियों की विस्तृत जानकारी दी।
सामूहिक शपथ से हुआ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने एकजुट होकर तंबाकू का सेवन न करने तथा दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करने की शपथ ली। यह शपथ समारोह कार्यक्रम का सबसे भावपूर्ण क्षण रहा जिसमें चिकित्सक, कर्मचारी और मरीज सभी ने एक साथ प्रतिज्ञा ली। विश्व तंबाकू निषेध दिवस हमें यह संदेश देता है कि स्वस्थ एवं खुशहाल जीवन के लिए तंबाकू का त्याग अत्यंत आवश्यक है।
महाविद्यालय के इस प्रयास ने यह सिद्ध किया कि चिकित्सा संस्थान न केवल उपचार का केंद्र हैं, बल्कि समाज में स्वास्थ्य जागरूकता फैलाने में भी अग्रणी भूमिका निभा सकते हैं। समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सक्रिय सहभागिता से ही तंबाकू-मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।


