कोलकाता। एक वक्त था जब पश्चिम बंगाल में भाजपा का नाम लेना भी राजनीतिक साहस का काम था। आज उसी बंगाल में एक जमीनी नेता मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने जा रहा है। नाम है — सुवेंदु अधिकारी। नंदीग्राम का वो योद्धा जिसने न सिर्फ ममता बनर्जी को बल्कि उनकी पूरी राजनीतिक विरासत को सीधे चुनौती दी — और जीता।
कांथी की गलियों से शुरू हुई सियासत
पश्चिम बंगाल के पूर्वी मिदनापुर जिले के कांथी में जन्मे सुवेंदु अधिकारी का राजनीति से नाता बचपन से रहा। पिता शिशिर अधिकारी वरिष्ठ नेता थे — राजनीतिक संस्कार घर से ही मिले। कांथी प्रभात कुमार कॉलेज में पढ़ाई के दौरान सुवेंदु छात्र राजनीति में कूद पड़े। कॉलेज में दो बार जनरल सेक्रेटरी और एक बार गवर्निंग बॉडी के सदस्य बने। वहां से कांथी नगरपालिका के काउंसिलर बने — और फिर रुके नहीं।
2001 में हारे — फिर कभी नहीं
2001 में पहली बार मुगबेरिया से विधानसभा चुनाव लड़ा — करीब 15,000 वोटों से हारे। यह हार उन्हें तोड़ नहीं सकी। 2006 में कांथी दक्षिण से जीतकर पहली बार विधायक बने। फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा — पांच बार विधायक और दो बार लोकसभा सदस्य भी रहे।
TMC छोड़ा — BJP में आए — बंगाल जीता
सुवेंदु पहले तृणमूल कांग्रेस में थे और ममता सरकार में मंत्री भी रहे। 2021 से पहले उन्होंने TMC छोड़कर BJP का दामन थामा। उस वक्त यह फैसला जोखिम भरा लगा था — लेकिन आगे चलकर यही निर्णय बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ।
नंदीग्राम — वो जगह जिसने बदल दी तस्वीर
नंदीग्राम वही जगह है जहां से ममता बनर्जी ने कभी वामपंथियों को उखाड़ फेंका था। 2021 में इसी नंदीग्राम से सुवेंदु ने ममता को पहली बार सीधे हराया। 2026 में उन्होंने ममता के गढ़ भवानीपुर में पहुंचकर दोबारा पराजित किया। दो बार — दो अलग सीटों से — ममता बनर्जी को हराना कोई साधारण उपलब्धि नहीं है। इसके साथ ही 2026 में वे नंदीग्राम और भवानीपुर — दोनों सीटों पर एक साथ जीते।
207 सीटें — इतिहास रचा
2026 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 294 में से 207 सीटें जीतीं। TMC महज 80 सीटों पर सिमट गई। यह सिर्फ एक चुनावी जीत नहीं थी — यह तीन दशकों की वामपंथी और फिर TMC की राजनीतिक पकड़ का अंत था। इस जीत का सबसे बड़ा चेहरा थे — सुवेंदु अधिकारी।
नेता प्रतिपक्ष से नेता सदन तक
सुवेंदु पिछले सदन से विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा रहे थे। TMC सरकार में हर मुद्दे पर तीखा विरोध — चुनाव बाद हिंसा, भ्रष्टाचार, घुसपैठ — हर मोर्चे पर डटे रहे। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा — “सुवेंदु के सशक्त नेतृत्व में पश्चिम बंगाल ‘सोनार बांग्ला’ के संकल्प की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।”
9 मई — रवींद्र जयंती पर नया इतिहास
शनिवार 9 मई को रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती के अवसर पर कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में सुवेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। बंगाल के सबसे बड़े सांस्कृतिक दिन पर राज्य का सबसे बड़ा राजनीतिक बदलाव — यह संयोग नहीं, यह इतिहास है।
