नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच देशों की अपनी विदेश यात्रा के चौथे चरण में आज नॉर्वे रवाना हो रहे हैं। 15 से 20 मई के बीच चल रही इस यात्रा में वे UAE, नीदरलैंड्स और स्वीडन का दौरा कर चुके हैं। अब 18-19 मई को ओस्लो में भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन और द्विपक्षीय बैठकों के लिए नॉर्वे पहुंचेंगे। 43 वर्षों के बाद भारतीय प्रधानमंत्री नोर्वे की यात्रा पर जा रहे हैं।
नीदरलैंड्स और स्वीडन से नॉर्वे तक — यात्रा का सफर
PM मोदी ने इस यात्रा की शुरुआत 15 मई को UAE से की — जहां UAE राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से मुलाकात हुई और रक्षा, ऊर्जा और व्यापार पर अहम समझौते हुए। इसके बाद नीदरलैंड्स में सेमीकंडक्टर और डिजिटल तकनीक सहयोग पर 17 समझौते हुए। स्वीडन में व्यापार और नवाचार पर चर्चा हुई। अब नॉर्वे चौथा और अहम पड़ाव है — जहां से वे 20 मई को इटली जाएंगे।
43 साल बाद क्यों — 1983 में क्या हुआ था
1983 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी नॉर्वे की यात्रा पर गई थीं। उस समय दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने और समुद्री सहयोग पर चर्चा हुई थी। नॉर्वे तब भी एक समृद्ध देश था — लेकिन आज जैसी वैश्विक अहमियत नहीं थी।
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43 सालों में नॉर्वे बहुत बदल गया। 1990 के दशक में उत्तरी सागर के तेल भंडारों से आई दौलत ने नॉर्वे को दुनिया के सबसे अमीर देशों में से एक बना दिया। आज नॉर्वे का Sovereign Wealth Fund यानी सरकारी निवेश कोष 1.8 ट्रिलियन डॉलर से भी अधिक का है — दुनिया में सबसे बड़ा। इसीलिए नॉर्वे अब महज एक छोटा Nordic देश नहीं — बल्कि एक आर्थिक महाशक्ति है।
इन 43 सालों में नॉर्वे भारत की विदेश नीति की प्राथमिकता में ज्यादा नहीं रहा — दोनों देश भौगोलिक दृष्टि से दूर भी हैं और ऐतिहासिक रूप से कोई बड़ा द्विपक्षीय मुद्दा नहीं था। लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं — हरित ऊर्जा संकट, समुद्री सहयोग, तकनीक और EFTA व्यापार समझौते ने दोनों देशों के बीच नए अवसर खोल दिए हैं।
नॉर्वे में क्या है खास — भारत के लिए क्यों जरूरी है यह यात्रा
नॉर्वे आज दुनिया को हरित ऊर्जा का भविष्य दिखा रहा है। महज 55 लाख की आबादी वाला यह छोटा सा देश कई मायनों में दुनिया का अगुवा है:
- दुनिया का सबसे बड़ा सरकारी निवेश कोष — 1.8 ट्रिलियन डॉलर से अधिक — जिसमें भारतीय पूंजी बाजार में पहले से करीब 2.8 लाख करोड़ रुपये का निवेश है
- जलविद्युत का चैंपियन — देश की 90% बिजली पनबिजली से आती है
- इलेक्ट्रिक वाहनों में दुनिया में नंबर एक — 90% नई गाड़ियां इलेक्ट्रिक हैं
- हरित हाइड्रोजन तकनीक में अग्रणी देश
- समुद्री तकनीक में विश्व नेता — भारत एक बड़ी समुद्री शक्ति है — नॉर्वे से बहुत कुछ सीखा जा सकता है
- कार्बन कैप्चर तकनीक में दुनिया का अग्रदूत
- यूरोप को 30% गैस आपूर्ति — वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा में बड़ी भूमिका
क्या होगा यात्रा में
PM मोदी नॉर्वे के राजा हैराल्ड पंचम और रानी सोन्या से मुलाकात करेंगे। नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोरे के साथ द्विपक्षीय वार्ता होगी। दोनों मिलकर Norway-India Business and Research Summit को संबोधित करेंगे। 19 मई को ओस्लो में तीसरे India-Nordic शिखर सम्मेलन में नॉर्वे, डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड और स्वीडन के नेताओं से भी मुलाकात होगी।
India-Nordic शिखर सम्मेलन — एजेंडा
तीसरे India-Nordic शिखर सम्मेलन में हरित ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, समुद्री सहयोग, रक्षा, अंतरिक्ष, डिजिटल नवाचार और आर्कटिक सहयोग पर चर्चा होगी। पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति भी एजेंडे में है। यह शिखर सम्मेलन 2018 में स्टॉकहोम और 2022 में कोपेनहेगन में हुए पिछले दो सम्मेलनों की कड़ी है।
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व्यापार और निवेश को नई गति
भारत और नॉर्वे के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2024 में करीब 2.73 अरब डॉलर रहा — जो पिछले दस वर्षों में दोगुना हो चुका है। India-EFTA व्यापार समझौता पिछले साल लागू हुआ — इस यात्रा से उसे और गति मिलने की उम्मीद है। Nordic देशों के साथ भारत का कुल व्यापार 2024 में 19 अरब डॉलर रहा।
