नई दिल्ली। देश भर के उन लाखों नौजवानों के लिए जो डॉक्टर बनने का सपना लेकर महीनों से रात-दिन पढ़ाई कर रहे थे, सोमवार का दिन उनके लिए एक बड़ा धक्का लेकर आया।केंद्र सरकार की मंजूरी से नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 3 मई को हुई NEET UG 2026 परीक्षा को रद्द करने का फैसला किया है। राजस्थान की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने अपनी पड़ताल में पाया कि असली प्रश्नपत्र के 120 से ज्यादा सवाल एक गेस पेपर में पहले से मौजूद थे। इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने सरकार की मंजूरी लेकर परीक्षा रद्द कर दी और परीक्षार्थियों को भरोसा दिलाया कि नई तारीखें जल्द बताई जाएंगी।
कैसे हुआ खुलासा
3 मई को परीक्षा खत्म होने के बाद SOG के पास सूचना आई कि एक हाथ से लिखा गेस पेपर पहले से बाजार में था। उस पेपर में कुल 410 सवाल थे और जांचकर्ताओं ने पाया कि इनमें से जीव विज्ञान के 90 और रसायन विज्ञान के 30 सवाल परीक्षा में आए सवालों से बिल्कुल मिलते थे। इस कड़ी को खींचते हुए SOG ने देहरादून, सीकर और झुंझुनू से 13 संदिग्धों को हिरासत में लिया। सीकर में एक कोचिंग संस्थान से जुड़े काउंसलर को भी हिरासत में लिया गया है।
₹20,000 से ₹2 लाख में बिका पेपर
सूत्रों के अनुसार यह गेस पेपर परीक्षा से 42 घंटे पहले WhatsApp के जरिए छात्रों तक पहुंचाया गया। इसकी कीमत ₹20,000 से लेकर ₹2 लाख तक वसूली गई। जो छात्र पैसे दे सकते थे उन्हें सवाल और जवाब दोनों मुहैया कराए गए। राजस्थान में अब तक 45 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
CBI को सौंपी जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है। NTA ने कहा है कि वो जांच एजेंसियों को हर जरूरी दस्तावेज और तकनीकी जानकारी मुहैया कराएगी। सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
छात्रों में गुस्सा
परीक्षा रद्द होने की खबर से पूरे देश के छात्रों में आक्रोश फैला हुआ है। सोशल मीडिया पर #NEET ट्रेंड कर रहा है। छात्रों का कहना है कि हर साल NEET में पेपर लीक का मामला सामने आता है, दोषी पकड़े भी जाते हैं लेकिन किसी को भी कड़ी सजा नहीं मिलती। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के जूनियर डॉक्टर्स ने भी सरकार से पारदर्शी जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
2024 के बाद फिर वही कहानी
NEET का विवादों से पुराना नाता रहा है। 2024 में भी यही हुआ था — बिहार और राजस्थान से गड़बड़ी के मामले उठे, CBI मैदान में आई और सरकार ने वादा किया कि अब ऐसा नहीं होगा। उस वादे को अभी दो साल भी नहीं बीते और हालात जस के तस हैं — अगर बदली है तो सिर्फ तारीख और साल।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि CBI जांच में कौन से बड़े नाम सामने आते हैं और लाखों छात्रों को दोबारा परीक्षा देने का मौका कब मिलेगा।
