कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की नृशंस हत्या के मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने उत्तर प्रदेश और बिहार से तीन पेशेवर शार्पशूटरों को दबोच लिया है। इन तीनों को सोमवार को बारासात कोर्ट में पेश किया गया जहां अदालत ने तीनों को 13 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
50 सेकंड में अंजाम दिया खूनी खेल
6 मई की रात उत्तर 24 परगना जिले के मध्यमग्राम इलाके में चंद्रनाथ रथ अपने घर लौट रहे थे। रास्ते में बाइक सवार बदमाशों ने उनकी गाड़ी को ओवरटेक कर रोका और करीब से ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। पूरी वारदात महज 50 सेकंड में हो गई और हमलावर मौके से फरार हो गए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार चंद्रनाथ को चार गोलियां लगीं, जिनमें से दो उनके सीने के आर-पार निकल गईं। उनके ड्राइवर बुद्धदेव बेरा भी गंभीर रूप से घायल हो गए।
कौन थे चंद्रनाथ रथ
चंद्रनाथ रथ ने भारतीय वायुसेना में करीब दो दशक तक देश की सेवा की थी। सेवानिवृत्ति के बाद रामकृष्ण मिशन के आदर्शों से प्रेरित होकर वे राजनीति में आए और शुभेंदु अधिकारी के साथ जुड़ गए। जब 2020 में शुभेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा तो चंद्रनाथ भी उनके साथ रहे। वे बंगाल चुनाव नतीजों के दो दिन बाद ही इस हमले का शिकार हुए।
UPI पेमेंट ने खोला राज
जांच में सबसे बड़ा सुराग एक डिजिटल लेनदेन से मिला। हमलावरों में से एक ने घटना के बाद एक टोल प्लाजा पर UPI के जरिए भुगतान किया। इसी डिजिटल फुटप्रिंट के आधार पर SIT की टीम ने झारखंड, उत्तर प्रदेश और बिहार तक अपनी जांच का दायरा फैलाया। मोबाइल ट्रैकिंग और तकनीकी निगरानी के जरिए आरोपियों की सटीक लोकेशन पता लगाई गई।
कौन हैं गिरफ्तार आरोपी
गिरफ्तार तीन मुख्य आरोपियों में पहला है राज सिंह उर्फ चंदन — उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के आनंद नगर का रहने वाला, जिसे अयोध्या से दबोचा गया। राज सिंह क्षत्रिय महासभा का महासचिव भी रहा है और 2020 में एक अंडा व्यवसायी की हत्या के मामले में आरोपी है — जमानत पर बाहर था। दूसरा और तीसरा आरोपी मयंक राज मिश्रा और विक्की मौर्य दोनों ही बिहार के बक्सर जिले के रहने वाले हैं। इसके अलावा बक्सर के पांडेयपट्टी निवासी कुख्यात हिस्ट्रीशीटर विशाल श्रीवास्तव को भी हिरासत में लिया गया था, हालांकि पूछताछ के बाद विशाल को छोड़ दिया गया। तीनों मुख्य आरोपियों को कोलकाता लाकर भवानी भवन में पूरी रात गहन पूछताछ की गई।
असली मास्टरमाइंड कौन
शूटरों की गिरफ्तारी के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस हत्या की सुपारी किसने दी। पुलिस को स्पष्ट संकेत मिले हैं कि यह एक सोची-समझी साजिश थी जिसमें अंतरराज्यीय अपराधियों का बड़ा नेटवर्क शामिल है। हमलावरों ने वारदात के लिए नकली नंबर प्लेट का सहारा लिया — सिलीगुड़ी के एक निवासी ने OLX पर अपनी कार बेचने का विज्ञापन दिया था, हमलावरों ने उस तस्वीर से नंबर कॉपी कर नकली प्लेट बनवाई। हमलावरों को पहले से पता था कि टारगेट गाड़ी में कहां बैठा है — यह इस बात का सबूत है कि अंदर से भी किसी ने जानकारी दी होगी।
