नई दिल्ली। NEET UG 2026 का पेपर लीक महज एक संयोग नहीं था — यह एक सुनियोजित साजिश थी जिसमें कई राज्यों के लोग शामिल थे। जांच एजेंसियों की प्रारंभिक पड़ताल में जो तस्वीर उभरी है वह बेहद चौंकाने वाली है। जयपुर की एक प्रिंटिंग प्रेस से शुरू हुआ यह सिलसिला सीकर, झुंझुनू, नागौर, देहरादून से होते हुए केरलम तक जा पहुंचा। CBI अब इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
शुरुआत — जयपुर की प्रिंटिंग प्रेस
जांचकर्ताओं का मानना है कि पेपर लीक की शुरुआत उसी प्रिंटिंग प्रेस से हुई जहां NEET 2026 का प्रश्नपत्र छापा गया था। यह प्रेस जयपुर में स्थित बताई जा रही है। प्रेस स्तर पर ही किसी अंदरूनी व्यक्ति ने पेपर की जानकारी बाहर पहुंचाई — यही वह बिंदु है जहां से पूरा खेल शुरू हुआ। अविनाश लांबा और मनीष यादव नाम के दो व्यक्ति जयपुर से हिरासत में लिए गए हैं जिनसे गहन पूछताछ जारी है।
सीकर — नेटवर्क का केंद्र
राजस्थान का सीकर कोचिंग का बड़ा केंद्र है और इस पूरे मामले में इसकी भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है। सीकर के एक कोचिंग संस्थान से जुड़े करियर काउंसलर राकेश कुमार मंडावरिया को SOG ने हिरासत में लिया है। जांच में पता चला है कि इसी व्यक्ति ने गेस पेपर एक केरलम के MBBS छात्र तक पहुंचाया था। मंडावरिया पेपर वितरण की इस कड़ी का एक अहम हिस्सा बताया जा रहा है।
देहरादून, झुंझुनू और नागौर तक फैला नेटवर्क
पेपर सिर्फ राजस्थान तक सीमित नहीं रहा। SOG ने सीकर और झुंझुनू के अलावा देहरादून तक अपनी जांच का दायरा फैलाया और वहां से भी संदिग्धों को हिरासत में लिया। नागौर भी इस जांच के दायरे में है। राजस्थान SOG और CBI मिलकर अब तक कुल छह ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी हैं और इस पूरे मामले में पूछताछ के लिए उठाए गए लोगों की संख्या 45 को पार कर गई है।
WhatsApp बना हथियार — 42 घंटे पहले पहुंचा पेपर
यह गेस पेपर परीक्षा से पूरे 42 घंटे पहले WhatsApp के जरिए छात्रों तक पहुंचाया गया। पेपर में कुल 410 सवाल थे और इनमें से जीव विज्ञान के 90 और रसायन विज्ञान के 30 सवाल हूबहू परीक्षा में आए। इसे ₹20,000 से लेकर ₹2 लाख तक में बेचा गया।
केरलम कनेक्शन
इस पूरे मामले में सबसे हैरान करने वाला मोड़ 2 मई की शाम को आया। केरलम के एक मेडिकल कॉलेज में MBBS पढ़ रहे एक छात्र ने अपने सीकर निवासी पिता के मोबाइल पर 300 सवालों का गेस पेपर WhatsApp पर भेजा। साथ में संदेश था — “सीकर के दोस्त ने भेजा है, अपने होस्टल की लड़कियों को दे देना — कल यही आएंगे।” पिता ने अगली सुबह होस्टल में वह पेपर बांट दिया। परीक्षा हुई और बीत गई। बाद में जब पास के एक कोचिंग शिक्षक ने मिलान किया तो होश उड़ गए — जीव विज्ञान के सभी 90 सवाल उस गेस पेपर में मौजूद थे। राजस्थान पुलिस के DGP आनंद कुमार श्रीवास्तव ने पुष्टि की कि प्रारंभिक जांच में गेस पेपर की उत्पत्ति केरलम से हुई है।
पहले भी हो चुका है — हर बार वही कहानी
यह पहली बार नहीं है जब NEET का पेपर लीक हुआ हो। 2021 में जयपुर के एक परीक्षा केंद्र से पेपर लीक हुआ था और 8 लोग गिरफ्तार हुए थे। 2024 में बिहार और राजस्थान से पेपर लीक का मामला सामने आया और CBI ने जांच की। हर बार वादा होता है — सिस्टम सुधरेगा। हर बार नया साल आता है और पुरानी कहानी दोहराती है।
अब देखना यह है कि CBI इस पूरी कड़ी को जोड़कर उस शख्स तक पहुंच पाती है जिसने सबसे पहले इस साजिश को अंजाम देने की योजना बनाई थी। 22 लाख से ज्यादा छात्रों का भविष्य इस जांच के नतीजे पर टिका है।
