गाज़ीपुर। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) उपासना रानी वर्मा ने प्रोन्नत एवं चयन वेतनमान के लंबित मामलों पर कड़ा रुख अपनाया। 6 अप्रैल 2026 को सभी खंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) से पात्र शिक्षकों के प्रस्ताव मांगे गए थे लेकिन तीन महीने से अधिक समय बाद भी पूरे जनपद से मात्र चार प्रस्ताव प्राप्त हुए। इस पर बेसिक शिक्षा अधिकारी ने “अति महत्वपूर्ण/तत्काल/शीर्ष प्राथमिकता” श्रेणी का पत्र जारी करते हुए तीन कार्यदिवस की डेडलाइन दी। यदि किसी पात्र शिक्षक को प्रस्ताव के अभाव में वेतनमान लाभ नहीं मिला तो संबंधित BEO को इसका उत्तरदायी माना जाएगा।
यह भी पढ़ें: पुलिस पहरे में विनीत राय के परिजन की चेन स्नैचिंग
पूरे जिले से सिर्फ चार प्रस्ताव
बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय से जारी पत्र के अनुसार शासनादेश संख्या 4307/15-8-3038/99 दिनांक 20 दिसंबर 2001 के अनुपालन में 6 अप्रैल 2026 को सभी BEO से पात्र शिक्षकों के प्रस्ताव मांगे गए थे। इसके बावजूद पूरे जनपद से केवल चार प्रस्ताव प्राप्त हुए।
पत्र में स्पष्ट किया गया है कि इतनी कम संख्या में प्रस्ताव प्राप्त होना यह दर्शाता है कि अधिकारियों ने शासन के निर्देशों को अपेक्षित गंभीरता से नहीं लिया।
प्रोन्नत वेतनमान के नियमों के अनुसार 10 वर्ष की संतोषजनक सेवा पर चयन वेतनमान और चयन वेतनमान में 12 वर्ष पूर्ण होने पर 20 प्रतिशत सीमा तक प्रोन्नत वेतनमान का लाभ मिलता है। यह नियम प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के अध्यापकों और प्रधानाध्यापकों पर लागू है। बेसिक शिक्षा अधिकारी की अध्यक्षता में चयन समिति वरिष्ठता के आधार पर पात्रता का परीक्षण करेगी।
यह समझना जरूरी है कि प्रोन्नत वेतनमान वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों का अधिकार है। इसमें देरी सीधे शिक्षकों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करती है। यही कारण है कि बेसिक शिक्षा अधिकारी ने इस बार कड़ा रुख अपनाया है।
शिक्षा निदेशक के निर्देश के बाद सख्ती
यह मामला केवल जिला स्तर तक सीमित नहीं है। शिक्षा निदेशक (बेसिक), उत्तर प्रदेश ने 13 जुलाई 2026 को पत्र जारी किया। इसके साथ विधान परिषद आश्वासन संख्या 12-63-2026 के तहत भी यह मामला शासन स्तर पर निगरानी में है।
इसी दबाव में बेसिक शिक्षा अधिकारी उपासना रानी वर्मा ने BEO की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए यह कड़ा पत्र जारी किया। BEO को यह प्रमाण-पत्र भी देना होगा कि उनके विकासखंड में कोई पात्र शिक्षक शेष नहीं है। यानी अब लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं बची है।
यह भी पढ़ें: गाज़ीपुर पुलिस के 15 आरक्षी बने उपनिरीक्षक
तीन दिन की डेडलाइन — BEO जिम्मेदार
बेसिक शिक्षा अधिकारी ने सभी BEO को निर्देश दिया है कि विगत पांच वर्षों के सभी पात्र शिक्षकों के प्रोन्नत वेतनमान संबंधी प्रस्ताव तीन कार्यदिवस के भीतर अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराएं।
उन्होंने कहा — “प्रस्ताव के अभाव में यदि कोई पात्र शिक्षक प्रोन्नत वेतनमान से वंचित रहता है तो इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी की होगी।”
बेसिक शिक्षा अधिकारी के इस कड़े रुख के बाद बेसिक शिक्षा विभाग में हलचल तेज हो गई है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि समयबद्ध तरीके से प्रस्ताव भेजे जाने पर वर्षों से लंबित कई शिक्षकों को राहत मिल सकती है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि तीन दिन की समयसीमा में कितने विकासखंड अपने प्रस्ताव भेजते हैं।



