अमित मणि त्रिपाठी
देवरिया। जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी और पुलिस अधीक्षक अभिजीत आर. शंकर ने शनिवार को जिला कारागार का औचक निरीक्षण किया। दोनों अधिकारियों ने संयुक्त रूप से जेल परिसर का भ्रमण करते हुए सुरक्षा व्यवस्था, साफ-सफाई, निगरानी प्रणाली और बंदियों को दी जा रही सुविधाओं का गहन जायजा लिया। बंदियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं की जानकारी भी ली गई।
सुरक्षा और निगरानी की जांच
बैरकों की सुरक्षा व्यवस्था का विस्तार से जायजा लिया गया। CCTV कैमरों और निगरानी तंत्र की कार्यस्थिति को भी जांचा गया। कारागार प्रशासन को सतर्क रहने और नियमित देखरेख बनाए रखने के कड़े निर्देश दिए गए। सभी बैरकों में आपत्तिजनक सामान की गहन तलाशी ली गई — हालांकि कोई आपत्तिजनक वस्तु नहीं मिली।
पेयजल, स्वच्छता और भोजन पर विशेष ध्यान
जिलाधिकारी ने पेयजल, स्वच्छता और शौचालय की व्यवस्था का खुद जायजा लिया और इन्हें और सुदृढ़ बनाने के निर्देश दिए। भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर भी सख्त हिदायत दी गई। उन्होंने कहा कि बंदियों को पौष्टिक और गुणवत्तायुक्त भोजन उपलब्ध कराना जेल प्रशासन की जिम्मेदारी है — इसमें किसी तरह की कोताही नहीं चलेगी। जेल मैनुअल के अनुसार बंदियों को सभी अनुबंधित सुविधाएं उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए गए।
महिला बैरक में मानवीय पहल — बच्चों को दिए बिस्किट
महिला बैरक के निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने वहां बंद महिला कैदियों से सीधे बात की और उनकी समस्याएं सुनीं। बैरक में मौजूद बच्चों को दोनों अधिकारियों ने बिस्किट दिए। साथ ही बच्चों के लिए बनाई गई बाल वाटिका का भी निरीक्षण किया गया — जो बच्चों के मानसिक और बौद्धिक विकास के लिए एक सराहनीय प्रयास है।
जिला कारागार निरीक्षण — क्यों जरूरी
जेलों का औचक निरीक्षण एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया है। नियमित निरीक्षण से जेल प्रशासन में पारदर्शिता बनी रहती है। बंदियों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित होती है और किसी भी तरह की अनियमितता को समय रहते रोका जा सकता है। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक का संयुक्त निरीक्षण इस बात का संकेत है कि देवरिया जिला प्रशासन जेल प्रबंधन को लेकर भी गंभीर है। निरीक्षण के दौरान जेल अधीक्षक आशीष रंजन, क्षेत्राधिकारी सदर संजय कुमार रेड्डी, डिप्टी जेलर राजकुमार, गीता रानी समेत कारागार प्रशासन के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
