कोलकाता। रवींद्र जयंती का दिन — 9 मई 2026 — पश्चिम बंगाल के इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गया। ब्रिगेड परेड ग्राउंड में जब राष्ट्रगान की धुन गूंजी, तब एक नए युग का आगाज हुआ — सुवेंदु अधिकारी ने बंगाल के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ग्रहण की।
एक लाख की भीड़, बंगाली रंग में रंगा मैदान
ब्रिगेड परेड ग्राउंड उस दिन किसी उत्सव से कम नहीं था। एक लाख से ज्यादा समर्थक जुटे। मैदान को बंगाल की सांस्कृतिक पहचान से सजाया गया था — झालमुड़ी और रसगुल्ले के स्टॉल जगह-जगह थे। विशिष्ट अतिथियों के भोजन में आलू दम, काली दाल, बैंगन भाजा, आलू पोश्तो जैसे पारंपरिक बंगाली व्यंजन परोसे गए। व्यवस्था संभालने के लिए 4 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे।
छह नेताओं ने ली शपथ
सुवेंदु अधिकारी के साथ पांच और नेताओं ने शपथ ली। दिलीप घोष और अग्निमित्रा पॉल उपमुख्यमंत्री बने। निसिथ प्रमाणिक, खुदीराम टुडू और अशोक कीर्तनिया ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की।
देश के दिग्गज एक छत के नीचे
इस समारोह में देश का राजनीतिक नेतृत्व एक साथ नजर आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सहित NDA के 20 से अधिक राज्यों के मुखिया इस पल के गवाह बने। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और स्मृति ईरानी भी कोलकाता पहुंचे।
जब PM मोदी ने झुककर लिया आशीर्वाद
समारोह का सबसे भावुक दृश्य तब सामने आया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंच पर BJP के सबसे वरिष्ठ कार्यकर्ता माखनलाल सरकार के पास आए। पीएम ने उनके पैर छुए, शॉल ओढ़ाया और देर तक उनसे बातें करते रहे। माखनलाल सरकार वे शख्सियत हैं जिन्होंने 1952 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कश्मीर में तिरंगा फहराने के आंदोलन में हिस्सा लिया था और 1980 से पार्टी संगठन से जुड़े हुए हैं। उनकी उपस्थिति ने इस समारोह को एक अलग ही ऊंचाई दे दी।

ममता की गैरहाजिरी — खामोश संदेश
बंगाल में डेढ़ दशक के TMC शासन का अध्याय इस दिन बंद हो गया। 2026 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 294 सीटों में से 207 जीतकर TMC को महज 80 सीटों पर रोक दिया। नतीजे आने के बाद ममता बनर्जी ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए और विधानसभा भंग करने के प्रस्ताव पर दस्तखत करने से भी मुकर गईं — जिसके बाद राज्यपाल आर.एन. रवि ने संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए विधानसभा भंग की। प्रोटोकॉल के तहत ममता को भी शपथ समारोह का न्योता भेजा गया — लेकिन उनका न आना खुद में एक बयान था।
