गाज़ीपुर। 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के महानायक और परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद की जयंती बुधवार को उनके पैतृक गांव धामूपुर, दुल्लहपुर स्थित अब्दुल हमीद पार्क में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। वीर अब्दुल हमीद का जन्म 1 जुलाई 1933 को इसी गांव में हुआ था। कार्यक्रम में उनके पुत्र जैनुअल हसन और पौत्र मोहम्मद परवेज ने क्षेत्र के गणमान्य लोगों के साथ केक काटकर जन्मोत्सव मनाया। भुड़कुड़ा के क्षेत्राधिकारी शुभम वर्मा ने पार्क में नई हाईमास्ट लाइट का उद्घाटन किया और पार्क के सौंदर्यीकरण में योगदान देने वाले समाजसेवी सद्दाम को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। स्थानीय लोगों ने पार्क में स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की मांग भी उठाई।
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प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुई शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत वीर अब्दुल हमीद और उनकी पत्नी की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुई। इसके बाद उपस्थित सभी लोगों ने पुष्पांजलि अर्पित कर शहीद के बलिदान को नमन किया। कार्यक्रम में भुड़कुड़ा के क्षेत्राधिकारी शुभम वर्मा, भाजपा जिला उपाध्यक्ष राजेश सोनकर, पूर्व मंडल अध्यक्ष मनोज यादव, श्रवण सिंह, समाजसेवी संजीत प्रजापति, अनिकेत चौहान और सुनील यादव समेत क्षेत्र के सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि वीर अब्दुल हमीद का अदम्य साहस और राष्ट्र के प्रति समर्पण आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लेते हुए कार्यक्रम का समापन मिठाई वितरण के साथ हुआ। कार्यक्रम का संचालन वीर अब्दुल हमीद के पौत्र मोहम्मद परवेज ने किया।
हाईमास्ट लाइट का उद्घाटन
कार्यक्रम के दौरान “आर्मी लवर” के नाम से प्रसिद्ध समाजसेवी सद्दाम को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। उन्होंने अब्दुल हमीद पार्क के सौंदर्यीकरण में उल्लेखनीय योगदान दिया था। पार्क में रंगाई-पुताई, मरम्मत और नई हाईमास्ट लाइट लगवाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। क्षेत्राधिकारी शुभम वर्मा ने उन्हें अंगवस्त्र भेंट कर उनके इस प्रयास की सराहना की।
इसके बाद क्षेत्राधिकारी ने नई हाईमास्ट लाइट का स्विच ऑन कर उद्घाटन किया। यह लाइट अब पार्क को रात में भी रोशन रखेगी। स्थानीय लोगों ने इसे वीर अब्दुल हमीद की स्मृति को सम्मान देने की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया।
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1965 युद्ध के महानायक
वीर अब्दुल हमीद का जन्म 1 जुलाई 1933 को गाज़ीपुर जिले के धामूपुर गांव में हुआ था। 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में उन्होंने असाधारण वीरता का परिचय दिया। युद्ध के दौरान उन्होंने दुश्मन के कई शक्तिशाली पैटन टैंकों को अकेले ध्वस्त किया। इस अदम्य साहस के बदले उन्होंने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उनकी अतुलनीय वीरता को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत देश के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र से सम्मानित किया।
कार्यक्रम के अंत में स्थानीय लोगों ने दुल्लहपुर के नवागत थाना प्रभारी संतोष राय से पार्क में स्थायी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग रखी। थाना प्रभारी ने इस संदर्भ में आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया। वीर अब्दुल हमीद की पावन स्मृति को समर्पित यह पार्क गाज़ीपुर की शान है और इसकी उचित देखभाल क्षेत्र के लोगों की भावनाओं से जुड़ी हुई है।

