वाराणसी। काशी की ऐतिहासिक दालमंडी एक बार फिर बुलडोजर की गड़गड़ाहट से गूंज उठी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर शनिवार सुबह 10 बजे से बड़े पैमाने पर ध्वस्तीकरण अभियान शुरू हो गया। तीन दिनों के भीतर 43 चिन्हित भवनों को जमींदोज किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में यह अब तक की सबसे बड़ी और सुनियोजित बुलडोजर कार्रवाइयों में से एक है।
650 मीटर की संकरी गली — बड़ा सपना
दालमंडी की कहानी समझने के लिए थोड़ा पीछे जाना होगा। यह 650 मीटर लंबा बाजार नई सड़क और चौक थाने को जोड़ता है — और काशी विश्वनाथ धाम जाने का एक अहम रास्ता भी है। सालों से यह रास्ता बेहद संकरा और अतिक्रमण की चपेट में रहा। श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ और यातायात की समस्या को देखते हुए योगी सरकार ने इसे 17.4 मीटर यानी करीब 60 फीट चौड़ा करने का फैसला किया। इस परियोजना पर करीब 225 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
अब तक 62 भवन ध्वस्त, 43 और की बारी
यह अभियान नया नहीं है — नवंबर 2025 में शुरू हुआ था। तब से अब तक कुल 62 भवनों को ध्वस्त किया जा चुका है। जनवरी 2026 में अभियान ने रफ्तार पकड़ी। फरवरी में एक साथ 30 भवनों पर बुलडोजर चला। मार्च में ईद के बाद फिर कार्रवाई हुई। और अब 9 मई से 43 और भवन गिराए जाएंगे। कुल मिलाकर इस परियोजना के तहत 186 भवनों को हटाया जाना है।
छावनी में तब्दील हुआ इलाका
किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने पूरे दालमंडी क्षेत्र को छावनी में बदल दिया है। बड़ी संख्या में पुलिस बल, पैरामिलिट्री जवान और कई थानों की टीमें तैनात हैं। ड्रोन से पूरे इलाके पर निगरानी रखी जा रही है। PWD के अधिशासी अभियंता केके सिंह ने बताया कि सभी चिन्हित भवनों की रजिस्ट्री हो चुकी है और मुआवजा भी दिया जा चुका है।
क्या बदलेगा दालमंडी में
परियोजना पूरी होने के बाद सड़क के दोनों ओर पटरी बनेगी। बिजली, पानी और सीवर की लाइनें अंडरग्राउंड होंगी। यातायात सुगम होगा और काशी विश्वनाथ धाम आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा मिलेगी। स्थानीय व्यापारियों को भी आधुनिक बाजार का लाभ मिलेगा। PWD ने दालमंडी के भविष्य का 3D वीडियो भी जारी किया है जो इस परियोजना की भव्यता को दर्शाता है।
विरासत और विकास की जंग
हालांकि यह कार्रवाई विवादों से भी अछूती नहीं रही। दालमंडी केवल एक बाजार नहीं — यह सैकड़ों साल पुरानी काशी की व्यापारिक और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा रही है। यहां कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक सामान और मोबाइल एसेसरीज का बड़ा थोक बाजार है। हजारों परिवारों की रोजी-रोटी इस बाजार से जुड़ी है। कई व्यापारियों ने पुनर्वास और न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। लेकिन प्रशासन का कहना है कि सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की गई हैं और मुआवजा दिया जा चुका है।
CM योगी की सीधी निगरानी
इस पूरी परियोजना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सीधी नजर है। वे समय-समय पर वाराणसी का दौरा कर कार्रवाई की समीक्षा करते रहे हैं। काशी विश्वनाथ धाम को विश्वस्तरीय तीर्थस्थल बनाने के उनके संकल्प में दालमंडी का यह चौड़ीकरण एक अहम कड़ी है।
