नई दिल्ली। 10 मई को हैदराबाद में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से अपील की — पेट्रोल-डीजल बचाओ, सोना मत खरीदो, विदेश यात्रा टालो, मेट्रो और कारपूलिंग का उपयोग करो। उन्होंने इसे “आर्थिक देशभक्ति” कहा। ठीक 5 दिन बाद — 15 मई को — देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3-3 रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई। इस घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया — अगर बचाना ही था तो दाम क्यों बढ़े? और अगर दाम बढ़ने ही थे तो बचाने की अपील का क्या मतलब था?
PM ने क्या-क्या कहा था
हैदराबाद के कार्यक्रम में PM मोदी ने विस्तार से बताया कि देश किस आर्थिक दबाव से गुजर रहा है। उन्होंने कहा — “जहां मेट्रो है वहां मेट्रो का उपयोग करें। कारपूलिंग करें। माल ढुलाई के लिए रेलवे का उपयोग करें — इससे पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम होगी।” उन्होंने वर्क फ्रॉम होम अपनाने, इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने, खाने में तेल की खपत घटाने और विदेश में शादी-जन्मदिन मनाने की “बढ़ती संस्कृति” से बचने की भी अपील की। साथ ही एक साल तक सोना न खरीदने का आग्रह किया।
तेल महंगा, रुपया कमजोर — सरकार के सामने बड़ी चुनौती
भारत अपनी कुल जरूरत का करीब 88 प्रतिशत कच्चा तेल विदेश से आयात करता है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बाधित होने से भारत के कुल कच्चे तेल आयात का 40-50 प्रतिशत और LNG का 60 प्रतिशत प्रभावित हुआ है। कच्चे तेल की कीमत 2025-26 में औसतन 71 डॉलर प्रति बैरल थी — जो इस संकट के चरम पर 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हो रहा है और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता जा रहा है। ऐसे में सरकार के सामने दो ही रास्ते थे — या तो तेल कंपनियों का घाटा सहती रहे, या दाम बढ़ाए। आखिरकार दाम बढ़ाना ही एकमात्र विकल्प बचा।
जनता ने समझ लिया था — पेट्रोल पंपों पर लगी लंबी कतारें
दिलचस्प बात यह है कि PM की अपील के बाद जनता ने उल्टा संदेश पकड़ा। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, गुजरात और बिहार सहित करीब 8 राज्यों के पेट्रोल पंपों पर “पैनिक बाइंग” का माहौल बन गया। लोगों ने सोचा — अगर PM बचाने की बात कर रहे हैं तो दाम जरूर बढ़ने वाले हैं। लंबी कतारें लगीं, टंकियां फुल करवाई गईं। और जो जनता ने सोचा — वही हुआ। 15 मई को पेट्रोल ₹3 महंगा हो गया।
RBI ने भी दी थी चेतावनी
PM की अपील के एक दिन बाद RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी चेतावनी दी थी कि वैश्विक ऊर्जा संकट से भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म UBS ने भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान 6.7 प्रतिशत से घटाकर 6.2 प्रतिशत कर दिया। विशेषज्ञों का कहना था कि जब तक मध्य पूर्व में शांति नहीं होती — भारत के लिए आगे का रास्ता मुश्किल रहेगा।
अब आम आदमी क्या करे
यही सबसे बड़ा सवाल है। जो रोज बाइक से दफ्तर जाता है — उसके लिए मेट्रो विकल्प नहीं है। जो खेत में काम करता है — उसके लिए वर्क फ्रॉम होम संभव नहीं। इलेक्ट्रिक वाहन खरीदना हर किसी के बस की बात नहीं। CNG अपनाने वालों को भी राहत नहीं — लखनऊ में CNG ₹95.75 प्रति किलो हो गई है। गर्मी में बिजली बिल, महंगा किराना और अब महंगा ईंधन — तीन तरफ से मार झेल रहे आम परिवारों के पास फिलहाल कोई आसान जवाब नहीं है।
