नासिक। महाराष्ट्र के नासिक शहर में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के दफ्तर से जुड़े धर्म परिवर्तन और उत्पीड़न के बहुचर्चित प्रकरण में आज बड़ा घटनाक्रम सामने आया। मुख्य आरोपी निदा खान को सोमवार को नासिक रोड अदालत के सामने पेश किया गया, जहां न्यायाधीश ने सुनवाई के बाद उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। अब वह नासिक रोड सेंट्रल जेल की सलाखों के पीछे रहेगी।
44 दिन, 5 शहर — आखिरकार पकड़ी गई
25 मार्च 2026 को मामला दर्ज होते ही निदा खान भूमिगत हो गई थी। करीब डेढ़ महीने तक वह पुलिस की पकड़ से फरार रही। जब-जब पुलिस उसके करीब पहुंती, वह पलक झपकते ही ठिकाना बदल लेती। नासिक से निकलकर ठाणे, फिर भीड़ भरे भिवंडी, मुंबई, सोलापुर होते हुए वह छत्रपति संभाजीनगर तक जा पहुंची। 7 मई की रात नासिक क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस ने मिलकर कैसर कॉलोनी के एक मकान पर दबिश दी और चार रिश्तेदारों के बीच छुपी निदा को आखिरकार दबोच लिया।
AIMIM पार्षद पर गंभीर आरोप
तफ्तीश में यह बात निकलकर आई कि फरारी के दौरान निदा खान स्थानीय AIMIM पार्षद मतीन मजीद पटेल से लगातार संपर्क में थी। पुलिस का कहना है कि पार्षद ने उसे छिपने की जगह और पैसों की मदद दी थी। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस खुलासे पर सख्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस पूरे गिरोह का पर्दाफाश होकर रहेगा और कोई भी बख्शा नहीं जाएगा।
मामले की जड़
यह पूरा मामला 26 मार्च 2026 को उस वक्त खुला जब एक पीड़िता ने देवलाली कैंप थाने में तहरीर दी। उसने बताया कि जुलाई 2022 से उसे शादी का सपना दिखाकर फंसाया गया, उसका धर्म बदलवाने की लगातार कोशिश की गई और दफ्तर में मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना दी गई। एक शिकायत से शुरू हुई जांच धीरे-धीरे बड़ी होती गई और नौ एफआईआर दर्ज हुईं। अब तक कुल आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
निदा की भूमिका क्या थी
एसआईटी की पड़ताल में सामने आया कि निदा TCS के बीपीओ में कार्यरत थी और वहां काम करने वाली हिंदू महिला सहकर्मियों को अपने घर ले जाती थी। वहां उन्हें धीरे-धीरे नमाज, हिजाब और इस्लामिक रीति-रिवाजों की आदत डलवाई जाती थी। जांचकर्ताओं को ऐसे डिजिटल सबूत हाथ लगे जिनसे पता चला कि एक पीड़िता को 171 से ज्यादा धार्मिक लिंक भेजे गए और उसका नाम तक बदलवा दिया गया। इसके साथ ही उसे किसी विदेशी देश में भेजने की साजिश भी रची जा रही थी।
अग्रिम जमानत पहले ही ठुकराई जा चुकी थी
निदा खान ने गर्भवती होने का दावा करते हुए अग्रिम जमानत मांगी थी। लेकिन 2 मई को अदालत ने यह अर्जी खारिज करते हुए साफ कहा कि यह मामला बेहद गंभीर और बहुस्तरीय है — पीड़िता का सुनियोजित ब्रेनवॉश किया गया था। अदालत ने यह भी कहा कि पूछताछ के बिना सच्चाई तक पहुंचना संभव नहीं।
अब 14 दिन की न्यायिक हिरासत के दौरान जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश करेंगी कि इस पूरे नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं और इसके तार कहां-कहां तक फैले हुए हैं।
