तेहरान/बेरूत/वाशिंगटन। 28 फरवरी 2026 को शुरू हुई जंग अभी थमी नहीं है। खामेनेई की मौत के बाद भी मध्य पूर्व की आग बुझने का नाम नहीं ले रही। एक तरफ होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर ताला लगा है — दूसरी तरफ लेबनान में बम गिर रहे हैं। खाड़ी देश दहशत में हैं और दुनिया की एक चौथाई तेल आपूर्ति अधर में लटकी है। आइए समझते हैं — आज मध्य पूर्व में हर मोर्चे पर क्या हो रहा है।
होर्मुज़ — दुनिया की सबसे खतरनाक गली
पहले समझते हैं होर्मुज़ है क्या। यह महज 24 मील चौड़ी एक समुद्री पट्टी है जो ईरान और ओमान के बीच है। लेकिन इस छोटी सी गली से दुनिया का 25% कच्चा तेल (Crude Oil) और 20% प्राकृतिक गैस (LPG) गुजरती है — यानी दुनिया का हर चौथा तेल का जहाज यहीं से निकलता है।। सरल भाषा में — अगर होर्मुज़ बंद हो जाए तो एशिया, यूरोप और अमेरिका में तेल की भारी किल्लत हो सकती है।
युद्ध से पहले हर महीने करीब 3,000 जहाज इस रास्ते से गुजरते थे। अब यह आंकड़ा सिर्फ 5% रह गया है — यानी हर महीने मात्र 150 जहाज। Maersk, CMA CGM और Hapag-Lloyd जैसी दुनिया की सबसे बड़ी शिपिंग कंपनियों ने तुरंत इस रास्ते से परिचालन रोक दिया।
28 फरवरी को जैसे ही युद्ध छिड़ा — ईरान ने होर्मुज़ बंद कर दिया। 8 अप्रैल के सीजफायर में शर्त थी कि रास्ता खोला जाएगा — लेकिन ईरान ने नहीं खोला। तब 13 अप्रैल को अमेरिका ने भी जवाबी नाकाबंदी शुरू कर दी — ईरानी बंदरगाहों की तरफ जाने वाले सभी जहाज रोक दिए गए। अब दोनों तरफ से नाकाबंदी है — विशेषज्ञ इसे “दोहरी नाकाबंदी” कह रहे हैं। ईरान ने होर्मुज़ बंद किया — अमेरिका ने ईरानी बंदरगाह बंद किए। नतीजा — पूरी खाड़ी व्यापार के लिहाज से लगभग ठप है।
7 मई को ईरान ने होर्मुज़ से गुजर रहे तीन अमेरिकी युद्धपोतों पर हमला किया — हालांकि कोई सीधा नुकसान नहीं हुआ। ट्रंप ने साफ चेतावनी दी — “समझौता नहीं हुआ तो ईरान से बस एक बड़ी रोशनी दिखेगी।” फ्रांस और ब्रिटेन ने मिलकर एक अंतरराष्ट्रीय रक्षा मिशन बनाने की घोषणा की है जो होर्मुज़ में जहाजों को सुरक्षित रास्ता देगा — लेकिन यह तभी शुरू होगा जब स्थायी सीजफायर हो।
लेबनान — सीजफायर कागज पर, जमीन पर जंग
लेबनान में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच अप्रैल में सीजफायर हुआ था — लेकिन यह सिर्फ कागज पर है। जमीन पर हमले रुके नहीं हैं। 9 मई को इजरायली हमलों में 24 लोग मारे गए — जिनमें महिलाएं और बच्चे भी थे। अल-सकसकियेह कस्बे पर हुए एक हमले में सात लोग मारे गए जिनमें एक बच्चा भी था।
युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक लेबनान में इजरायली हमलों में 2,700 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और 12 लाख से ज्यादा लोग अपना घर छोड़ने पर मजबूर हुए हैं। इजरायल ने दक्षिणी लेबनान के 12 गांवों को खाली करने का आदेश दिया है। हिजबुल्लाह ने भी इजरायली सीमा से लगे इलाकों में नागरिकों को हटने की चेतावनी दी है।
अमेरिका ने 14-15 मई को इजरायल और लेबनान के बीच वाशिंगटन में शांति वार्ता कराने की घोषणा की है — लेकिन लेबनान का कहना है कि जब तक हमले नहीं रुकते, बातचीत नहीं होगी।
खाड़ी देश — ड्रोन और मिसाइलों की मार
UAE और कुवैत दोनों ने 10 मई को ऐलान किया कि उन्होंने ईरान की ओर से आए ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलें मार गिराई हैं। UAE के रक्षा मंत्रालय के अनुसार युद्ध शुरू होने से अब तक कुल 551 बैलिस्टिक मिसाइलें, 29 क्रूज मिसाइलें और 2,263 ड्रोन रोके जा चुके हैं — यह अपने आप में एक चौंकाने वाला आंकड़ा है।
सऊदी अरब और UAE जैसे देश जो पहले से ही इस युद्ध से परेशान थे — अब और ज्यादा दबाव में हैं। इन देशों की अर्थव्यवस्था बड़े पैमाने पर तेल निर्यात पर निर्भर है — और होर्मुज़ बंद होने से उनका निर्यात भी प्रभावित हुआ है।
शांति की कोशिश — पर रास्ता कठिन
पाकिस्तान दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता कर रहा है। इस्लामाबाद में हुई वार्ता विफल रही। अब अमेरिका ने ईरान के सामने नया प्रस्ताव रखा है — ईरान उसकी समीक्षा कर रहा है और जल्द जवाब पाकिस्तान के जरिए देगा। ईरान के विदेश मंत्री का कहना है कि समझौता “बस इंचभर दूर” है — लेकिन अमेरिकी मांगें अभी भी बड़ी हैं।
मध्य पूर्व (Middle East) इस वक्त एक ऐसे चौराहे पर खड़ा है जहाँ एक गलत कदम पूरी दुनिया को हिला सकता है। होर्मुज़ बंद है, लेबनान जल रहा है, खाड़ी देश दहशत में हैं — और शांति की उम्मीद तो है, लेकिन रास्ता अभी बहुत लंबा है।
नोट: मानचित्र स्रोत — Globetrotter19 / Wikimedia Commons (CC BY 4.0)
