Deoria News: जब चालक ने किया इनकार, तब देवरिया एसडीएम दिशा श्रीवास्तव ने खुद चलाया ट्रैक्टर

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देवरिया न्यूज़, जनपद में चल रहे ऑपरेशन कब्जा मुक्ति अभियान के तहत एक दिलचस्प घटना सामने आई, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। सलेमपुर तहसील की तेजतर्रार एसडीएम दिशा श्रीवास्तव ने इस अभियान के दौरान ऐसा कदम उठाया, जिसकी हर ओर चर्चा हो रही है। दरअसल, ग्राम करौता में एक चकरोड पर गेहूं की फसल बोई गई थी, जिसे स्थानीय प्रशासन ने अवैध अतिक्रमण घोषित किया था। जब प्रशासन की टीम इस अतिक्रमण को हटाने के लिए मौके पर पहुंची, तब वहां उपस्थित ट्रैक्टर चालक ने वाहन चलाने से इनकार कर दिया। इस स्थिति को देख मौके पर मौजूद लोग हैरान रह गए।

हालांकि, एसडीएम दिशा श्रीवास्तव ने बिना समय गंवाए खुद ट्रैक्टर की सीट संभाली और पूरी दृढ़ता के साथ वाहन चलाते हुए चकरोड पर मौजूद फसल को हटाकर रास्ता साफ कराया। उनका यह कदम न केवल प्रशासनिक सख्ती का प्रतीक बना, बल्कि उनके साहस और कार्य के प्रति समर्पण की भी मिसाल बन गया। इस घटना के बाद क्षेत्र में उनकी जमकर सराहना हो रही है, वहीं सोशल मीडिया पर एसडीएम का यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया है। लोगों द्वारा उन्हें एक सख्त, लेकिन न्यायप्रिय अधिकारी के रूप में सराहा जा रहा है।

देवरिया की धाकड़ एसडीएम बनीं सुर्खियों में

देवरिया जनपद में एसडीएम दिशा श्रीवास्तव का नाम इन दिनों सुर्खियों में छाया हुआ है। अवैध अतिक्रमण के खिलाफ उनके साहसिक कदम के बाद लोग उन्हें देवरिया की ‘धाकड़ एसडीएम’ के नाम से पहचानने लगे हैं। उनकी इस कार्यवाही ने न केवल स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना दिया है, बल्कि उनकी नेतृत्व क्षमता और प्रशासनिक दृढ़ता की भी खूब सराहना हो रही है।

यह पहली बार नहीं है जब एसडीएम दिशा श्रीवास्तव ने ऐसा कड़ा रुख अपनाया हो। इससे पहले भी उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान 26 गांवों में अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर अपनी कार्यशैली का परिचय दिया था। उनकी इन प्रभावशाली कार्रवाइयों के चलते जनता के बीच उनकी छवि एक निडर, ईमानदार और निष्पक्ष अधिकारी के रूप में बनी है।

स्थानीय नागरिकों का मानना है कि प्रशासनिक पदों पर बैठे अधिकारियों को इसी प्रकार अपने दायित्वों का पालन करना चाहिए। कई लोगों का कहना है कि यदि सभी अधिकारी इसी तरह अपनी जिम्मेदारियों को पूरी तत्परता और निष्पक्षता के साथ निभाएं तो समाज से अव्यवस्था और भ्रष्टाचार को समाप्त किया जा सकता है। एसडीएम दिशा श्रीवास्तव की इस पहल को आम जनता ने सराहा है और उम्मीद जताई है कि भविष्य में भी वह इसी तरह न्यायसंगत फैसले लेकर जनहित में कार्य करती रहेंगी।

कौन हैं एसडीएम दिशा श्रीवास्तव?

एसडीएम दिशा श्रीवास्तव उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध शहर गोरखपुर की रहने वाली हैं। उनका जन्म और पालन-पोषण गोरखपुर में ही हुआ, जहां उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की। शिक्षा के प्रति उनका झुकाव शुरू से ही काफी गहरा था। पढ़ाई में बचपन से ही अव्वल रहने वाली दिशा श्रीवास्तव ने अपनी मेहनत और लगन से हर कक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद दिशा ने सिविल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा के लिए बीटेक (B.Tech) का चुनाव किया और इस क्षेत्र में भी उन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा का लोहा मनवाया। अपनी पढ़ाई के दौरान वह न केवल विषय में निपुण रहीं, बल्कि गोल्ड मेडलिस्ट बनने का गौरव भी हासिल किया। उनके इस शानदार प्रदर्शन ने उनके आत्मविश्वास को और मजबूत किया।

इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान ही दिशा श्रीवास्तव ने ठान लिया था कि उन्हें प्रशासनिक सेवा में जाना है और समाज के लिए कुछ बड़ा करना है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPCS) परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। खास बात यह है कि उन्होंने इस कठिन परीक्षा के लिए किसी भी कोचिंग का सहारा नहीं लिया। दिशा ने घर पर ही रहकर तीन साल तक पूरी लगन और अनुशासन के साथ अपनी तैयारी जारी रखी। उनकी मेहनत रंग लाई और अपने पहले ही प्रयास में उन्होंने UPPCS परीक्षा में 21वीं रैंक हासिल कर सफलता प्राप्त की।

दिशा श्रीवास्तव की इस सफलता ने उन्हें प्रशासनिक सेवा में एसडीएम के पद पर नियुक्त किया। अपनी पहली ही पोस्टिंग के दौरान उन्होंने अपनी कार्यशैली और दृढ़ निश्चय से जनता के बीच अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी कड़ी मेहनत, ईमानदारी और जनहित के लिए समर्पण ने उन्हें एक सख्त लेकिन संवेदनशील अधिकारी के रूप में पहचान दिलाई।

पहले ही प्रयास में मिली सफलता

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) द्वारा वर्ष 2020 में आयोजित परीक्षा में एसडीएम दिशा श्रीवास्तव ने अपनी मेहनत और लगन के बल पर 21वीं रैंक हासिल कर बड़ी उपलब्धि प्राप्त की। यह कामयाबी उनके अथक परिश्रम और दृढ़ निश्चय का परिणाम थी। परीक्षा में सफल होने के बाद उन्हें पहली पोस्टिंग के रूप में आजमगढ़ में एसडीएम के पद पर तैनाती मिली।

आजमगढ़ में कार्यरत रहते हुए अपनी कर्तव्यनिष्ठा और अनुशासित कार्यशैली के कारण उन्होंने अधिकारियों और जनता के बीच खास पहचान बनाई। उनकी सख्त लेकिन न्यायसंगत कार्यप्रणाली के चलते जल्द ही उन्हें देवरिया में एसडीएम पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। देवरिया में नियुक्ति के बाद भी उन्होंने अपनी कार्यशैली से प्रशासनिक व्यवस्थाओं को मजबूत करने का कार्य किया। उनकी ईमानदारी और मेहनत के चलते क्षेत्र में अवैध कब्जों और अन्य प्रशासनिक मामलों में तेजी से सुधार देखा गया।

एसडीएम दिशा श्रीवास्तव ने अपने कड़े फैसलों, निष्पक्ष रवैये और दृढ़ संकल्प के बल पर जनता के बीच अपनी मजबूत छवि बनाई है। उनकी यह उपलब्धि प्रशासनिक क्षेत्र में कार्यरत अन्य अधिकारियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

ऑपरेशन कब्जा मुक्ति अभियान में दिखाया साहस

देवरिया जिले में अवैध अतिक्रमण को समाप्त करने के उद्देश्य से प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन कब्जा मुक्ति अभियान में लगातार सख्त कार्रवाई देखने को मिल रही है। इस अभियान के तहत जिला प्रशासन गांव-गांव जाकर सरकारी जमीनों को अवैध कब्जों से मुक्त कराने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। इस मुहिम में खासतौर पर एसडीएम दिशा श्रीवास्तव अपनी कार्यशैली और कड़े रुख के चलते सुर्खियों में हैं।

अभियान के तहत एसडीएम दिशा श्रीवास्तव अपनी टीम के साथ लगातार विभिन्न गांवों का दौरा कर रही हैं। वह स्वयं मौके पर मौजूद रहकर अभियान की निगरानी करती हैं ताकि कार्रवाई में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो। इसी क्रम में जब वह करौता गांव पहुंचीं, तो वहां के चकरोड पर अवैध रूप से बोई गई गेहूं की फसल को देखकर उन्होंने इसे अतिक्रमण मानते हुए तुरंत हटाने के निर्देश दिए।

हालांकि, जब उन्होंने वहां मौजूद ट्रैक्टर चालक को फसल हटाने के लिए ट्रैक्टर चलाने का आदेश दिया, तो चालक ने वाहन चलाने से साफ इनकार कर दिया। स्थिति को बिगड़ते देख एसडीएम दिशा श्रीवास्तव ने बिना कोई देरी किए खुद ट्रैक्टर का स्टेयरिंग संभाल लिया। बिना किसी झिझक और हिचकिचाहट के उन्होंने ट्रैक्टर चलाकर चकरोड से अवैध कब्जा हटवा दिया।

उनके इस साहसिक कदम ने न केवल प्रशासनिक अमले को प्रेरित किया, बल्कि स्थानीय लोगों के बीच भी उनकी सराहना की जा रही है। एसडीएम दिशा श्रीवास्तव की इस पहल को लेकर जिले भर में चर्चा का माहौल है, और लोग उनकी कार्यशैली की खुलकर तारीफ कर रहे हैं।

अतिक्रमण के खिलाफ पहले भी रही हैं सक्रिय

एसडीएम दिशा श्रीवास्तव का अवैध अतिक्रमण के खिलाफ सख्त रुख कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी वह कई मौकों पर इसी तरह की कड़ी कार्रवाई कर चुकी हैं। देवरिया जनपद में उनके नेतृत्व में अब तक 26 गांवों में अवैध कब्जा हटाने के अभियान सफलतापूर्वक चलाए जा चुके हैं। इन अभियानों में उन्होंने न केवल सरकारी भूमि को कब्जा मुक्त कराया, बल्कि आम लोगों के आवागमन में बाधा बन चुके सार्वजनिक रास्तों को भी साफ कराया गया।

एसडीएम दिशा श्रीवास्तव के इन अभियानों में विशेष ध्यान उन क्षेत्रों पर दिया गया, जहां वर्षों से अतिक्रमण के कारण स्थानीय निवासियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। उनकी मुस्तैदी और सक्रियता के चलते कई सरकारी भवन, तालाब, और रास्ते अतिक्रमणकारियों के कब्जे से वापस लिए गए। उनकी कार्यशैली का एक बड़ा प्रभाव यह रहा कि लोग प्रशासन की कार्रवाई को लेकर अब अधिक जागरूक हो गए हैं।

हर अभियान में दिशा श्रीवास्तव ने खुद मौके पर मौजूद रहकर न केवल कार्रवाई का निरीक्षण किया, बल्कि स्थानीय अधिकारियों और पुलिस बल को उचित निर्देश भी दिए। उनकी इस तत्परता और कर्मठता के चलते देवरिया में प्रशासन की सक्रियता का नया उदाहरण प्रस्तुत हुआ है।

जनता ने सराहा एसडीएम का जज्बा

एसडीएम दिशा श्रीवास्तव के इस साहसी और प्रभावी निर्णय को लेकर स्थानीय निवासियों ने जमकर प्रशंसा की है। ग्रामीणों का मानना है कि ऐसे कर्मठ और निडर प्रशासनिक अधिकारी ही समाज में बदलाव लाने में सक्षम होते हैं। लोगों का कहना है कि यदि हर अधिकारी इसी तरह बिना किसी डर और संकोच के अपनी जिम्मेदारियों को निभाए, तो अवैध कब्जा, अतिक्रमण और अन्य प्रशासनिक समस्याओं का जल्द ही समाधान हो सकता है।

इसके अलावा, ग्रामीणों ने यह भी कहा कि इस तरह के ठोस और निर्णायक कदम से जनता के भीतर प्रशासन के प्रति विश्वास और भी मजबूत होता है। उनके अनुसार, अगर अधिकारी स्वयं मैदान में उतरकर इस तरह के कार्यों को अंजाम देते रहेंगे, तो स्थानीय स्तर पर व्याप्त अव्यवस्था और अन्य समस्याएं समाप्त हो सकती हैं। लोगों का मानना है कि एसडीएम द्वारा खुद ट्रैक्टर चलाकर अतिक्रमण हटाने का यह साहसिक कदम न केवल प्रशंसा के योग्य है, बल्कि अन्य अधिकारियों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करता है।

-अमित मणि त्रिपाठी